नागालैंड की फिल्म ‘अंग’ (Angh) ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी खास पहचान बना ली है। नागा फिल्ममेकर तेजा रियो के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल यानी TIFF में प्रतिष्ठित प्लेटफॉर्म प्राइज अपने नाम कर लिया है। इस बड़ी उपलब्धि के साथ ‘अंग’ ने ऑस्कर 2027 की राह भी पकड़ ली है।
दरअसल, ‘अंग’ को उसकी अनोखी कहानी, शानदार फिल्म निर्माण और नागा समाज की दुनिया को प्रभावशाली तरीके से पर्दे पर उतारने के लिए सम्मानित किया गया है। फिल्म की कहानी 1960 के दशक के नागालैंड में सेट है, जहां एक पिता और बेटे के रिश्ते के जरिए उस दौर में हो रहे सामाजिक और सांस्कृतिक बदलावों को दिखाया गया है। फिल्म में आधुनिक सुख-सुविधाओं के आकर्षण के साथ धर्म परिवर्तन और उसके स्थानीय संस्कृति पर पड़ने वाले प्रभाव को भी कहानी का हिस्सा बनाया गया है।
‘अंग’ की सबसे खास बात इसकी भाषा और स्थानीय पृष्ठभूमि है। फिल्म का बड़ा हिस्सा कोन्याक भाषा में है और यह नागा संस्कृति, परंपराओं और समाज की उस दुनिया को सामने लाती है, जिसे मुख्यधारा के भारतीय सिनेमा में कम ही देखने को मिलता है। यही स्थानीय रंग फिल्म को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के लिए भी अलग और खास बनाता है।
खास बात यह है कि तेजा रियो की यह फिल्म उनकी साल 2021 में पुरस्कार जीत चुकी शॉर्ट फिल्म पर आधारित है। यानी एक छोटी फिल्म से शुरू हुआ सफर अब अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल की बड़ी जीत तक पहुंच चुका है। TIFF में प्लेटफॉर्म प्राइज जीतने के बाद ‘अंग’ अब ऑस्कर 2027 की बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी के लिए पात्र हो गई है।
नागालैंड से निकली ‘अंग’ की यह कामयाबी सिर्फ एक फिल्म की जीत नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा में क्षेत्रीय कहानियों की बढ़ती पहुंच की भी मिसाल है। अब नजर ऑस्कर 2027 पर होगी, जहां ‘अंग’ अंतरराष्ट्रीय फिल्मों के बीच अपनी जगह बनाने की कोशिश करेगी। नागा संस्कृति और कोन्याक भाषा की कहानी को दुनिया के बड़े फिल्म मंच तक पहुंचाने वाली ‘अंग’ ने निश्चित तौर पर भारतीय सिनेमा का दायरा और बड़ा कर दिया है।


