रायपुर :- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में श्रीमद भागवत कथा का भव्य आयोजन जारी है। कृषि मंडी देवेन्द्रनगर के मैदान में चल रही सात दिवसीय कथा में प्रसिद्ध भागवताचार्य संत श्री इन्द्रेश महाराज श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत का रसपान करा रहे हैं। कथा के दूसरे दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु और युवा कथा स्थल पर पहुंचे। भक्ति गीतों और भगवान जगन्नाथ व राधा-कृष्ण के जयकारों से पूरा पंडाल भक्तिमय नजर आया।
आगामी श्राद्ध पक्ष को ध्यान में रखते हुए इन्द्रेश महाराज ने पितरों के प्रति श्रद्धा और परिवार के बड़े-बुजुर्गों के प्रति कर्तव्यों का संदेश दिया। उन्होंने भगवान जगन्नाथ की लीलाओं का वर्णन करते हुए बताया कि महाप्रभु जगन्नाथ जी भी मनुष्यों की तरह लीला करते हुए अपने माता-पिता राजा इन्द्रद्युम्न और गुंडीचा महारानी का श्राद्ध करते हैं। उन्होंने बताया कि श्राद्ध के अवसर पर पुरी में भगवान विशेष भेष धारण करते हैं। महाराज ने पंडाल में मौजूद युवाओं और श्रद्धालुओं से अपनी परंपराओं को समझने, माता-पिता और बुजुर्गों का सम्मान करने तथा संस्कारों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
कथा के दौरान इन्द्रेश महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की ब्रजलीलाओं और पंचतत्वों के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मनुष्य का शरीर पृथ्वी, अग्नि, जल, वायु और आकाश जैसे पंचतत्वों से बना है, इसलिए इनका संरक्षण करना भी हमारा धर्म और जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रकृति को हो रहे नुकसान और नदियों में बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताते हुए यमुना सहित देश की नदियों को स्वच्छ रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि पवित्रता के साथ स्वच्छता को भी जीवन का हिस्सा बनाया जाए तो भारत को स्वर्ग से भी सुंदर बनाया जा सकता है।
इन्द्रेश महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक प्रसंगों को सुनने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन को धर्म, संस्कार और सदाचार की दिशा देने का अवसर है। कथा में गीत गोविंद और सनातन परंपराओं से जुड़े प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को अपनी परंपराओं और पूर्व आचार्यों की शिक्षाओं को समझने का संदेश दिया गया। वहीं भगवान जगन्नाथ के महाप्रसाद की महिमा का भी वर्णन किया गया। कथा के पांचवें दिन रायपुर में महाप्रसाद वितरण की तैयारी की जा रही है, जिसके लिए जगन्नाथपुरी से महाप्रसाद मंगाने की व्यवस्था की जा रही है।
कथा के दूसरे दिन बड़ी संख्या में संतजनों की भी उपस्थिति रही। मुख्य सेवादार गुंजन प्रजापति ने बताया कि इन्द्रेश महाराज के पिताश्री भी वृंदावन से रायपुर पहुंचे, जिनका व्यासपीठ से स्वागत किया गया और श्रद्धालुओं से उनका परिचय सद्गुरुदेव के रूप में कराया गया। सात दिवसीय इस आयोजन में युवाओं की भागीदारी भी देखने को मिल रही है। धर्म, संस्कार, पर्यावरण संरक्षण और बुजुर्गों के सम्मान के संदेशों के साथ कथा स्थल पर श्रद्धालु भक्ति और आध्यात्मिक भाव में डूबे नजर आ रहे हैं।


