रायपुर :- कृषि मंडी देवेंद्रनगर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन भागवताचार्य इन्द्रेश महाराज ने वामन द्वादशी के अवसर पर भगवान वामन अवतार की कथा का वर्णन किया। कथा के दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं को जीवन में आने वाली कठिन परिस्थितियों के बीच भगवान के नाम और भक्ति से जुड़े रहने का संदेश दिया।
इन्द्रेश महाराज ने कहा कि जीवन में परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, व्यक्ति को भगवत नाम का त्याग नहीं करना चाहिए। उन्होंने भगवत नाम को छतरी के समान बताते हुए कहा कि संकट, संघर्ष, पीड़ा और कष्ट के समय भगवान का नाम मनुष्य को संबल देता है। उन्होंने कहा कि जीवन में टेढ़े दिन आ सकते हैं, लेकिन भक्ति में टेढ़े दिन नहीं आने चाहिए और ठाकुर जी के प्रति प्रेम बना रहना चाहिए।
ईर्ष्या को बताया बड़ा दोष
कथा के दौरान इन्द्रेश महाराज ने ईर्ष्या को मनुष्य के जीवन का बड़ा दोष बताया। उन्होंने कहा कि आज कई लोग दूसरों की सादगी, खुशी, सुख और भलाई को देखकर परेशान हो जाते हैं। व्यक्ति को दूसरों की परिस्थितियों से तुलना करने के बजाय अपने जीवन में संतोष और भक्ति का भाव रखना चाहिए।
‘प्रभु के लिए विरह हर किसी को नहीं आता’
प्रेम और विरह की व्याख्या करते हुए इन्द्रेश महाराज ने कहा कि जब किसी व्यक्ति को किसी से प्रेम होता है तो वह उससे मिलने और उसे देखने के लिए कई बहाने तलाशता है। उन्होंने इसी भाव को भगवान के प्रति प्रेम से जोड़ते हुए मीराबाई और वृत्रासुर के प्रसंग का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि सांसारिक सुख के प्रति आसक्ति स्थायी नहीं होती, जबकि भगवान के प्रति प्रेम में सच्ची व्याकुलता और समर्पण होना चाहिए। उनके अनुसार भगवान के प्रति ऐसा प्रेम और विरह हर किसी के जीवन में सहज रूप से नहीं आता।
छल-कपट और झूठ से बचने की सीख
इन्द्रेश महाराज ने श्रद्धालुओं को छल, कपट और झूठ जैसे अवगुणों से दूर रहने की सीख दी। उन्होंने कहा कि किसी के साथ गलत करने के बाद केवल क्षमा मांग लेना पर्याप्त नहीं है। गलती स्वीकार करने के साथ यह संकल्प भी जरूरी है कि भविष्य में वह गलती दोबारा नहीं होगी और अवगुणों का त्याग किया जाएगा।
उन्होंने बाहरी वेशभूषा देखकर किसी व्यक्ति के स्वभाव का आकलन नहीं करने की बात भी कही और श्रद्धालुओं को सावधानी बरतने का संदेश दिया।
भगवान जगन्नाथ स्वर्ण वेष में विराजमान
कथा स्थल पर भगवान जगन्नाथ प्रभु, माता सुभद्रा, बलभद्र जी और सुदर्शन जी को प्रतिदिन अलग-अलग पोशाक में सजाया जा रहा है। कथा के तीसरे दिन भगवान जगन्नाथ स्वर्ण वेष में विराजमान रहे। श्रद्धालुओं ने भगवान के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन किए।
कौशल्या देवी साय और मीनल चौबे ने सुनी कथा
श्रीमद्भागवत कथा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी कौशल्या देवी साय और महापौर मीनल चौबे भी कथा श्रवण करने पहुंचीं। इस दौरान सेवादार गुंजन प्रजापति और समिति के सदस्यों ने उनका स्वागत किया।
बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कायम
कथा के तीसरे दिन दोपहर में तेज बारिश हुई, लेकिन इसका असर श्रद्धालुओं के उत्साह पर नहीं पड़ा। वाटरप्रूफ पंडाल होने के कारण श्रद्धालु कथा स्थल पर मौजूद रहे और नियत समय पर कथा का श्रवण किया।
इन्द्रेश महाराज ने बारिश के बीच कथा में पहुंचे श्रद्धालुओं की आस्था की सराहना करते हुए कहा कि महाप्रभु के प्रति प्रेम रखने वाले भक्त परिस्थितियों से नहीं रुकते। आयोजन समिति की ओर से भी श्रद्धालुओं के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया गया।
कथा के तीसरे दिन इन्द्रेश महाराज के संदेश का केंद्र भगवान के प्रति भक्ति, भगवत नाम का स्मरण, ईर्ष्या से बचाव और जीवन में सदाचार बनाए रखने पर रहा।


