रायपुर। देवेन्द्रनगर स्थित मंडी ग्राउंड में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन भागवताचार्य इन्द्रेश महाराज ने भक्ति, मुक्ति, संतोष और गुरु के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मुक्ति के लिए एक क्षण भी पर्याप्त हो सकता है, लेकिन मनुष्य को अपने जीवन का प्रत्येक दिन भगवान के स्मरण और भक्ति में लगाना चाहिए। मृत्यु के समय प्रभु का स्मरण बना रहे, इसके लिए जीवनभर भगवान का नाम लेते रहना आवश्यक है।

संतोष से मिलता है मन को सुकून

इन्द्रेश महाराज ने कहा कि संतोष मनुष्य को भीतर से प्रसन्न और स्थिर रखता है। निरंतर असंतुष्ट रहने वाला व्यक्ति भक्ति के मार्ग पर लंबे समय तक स्थिर नहीं रह सकता। उन्होंने वेद व्यास का उदाहरण देते हुए कहा कि भागवत की रचना के बाद भी उन्हें पूर्ण संतुष्टि नहीं मिली थी। भगवान के यश और ऐश्वर्य के साथ उनकी प्रेममयी लीलाओं का वर्णन किए जाने के बाद उन्हें पूर्णता का अनुभव हुआ।

भगवान के अवतार में भक्तिभाव का विशेष महत्व

प्रवचन के दौरान इन्द्रेश महाराज ने कहा कि मनुष्य को किसी दूसरे के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए, जैसा व्यवहार वह स्वयं के लिए पसंद नहीं करता। असहाय और जरूरतमंद की सहायता करना पुण्य का कार्य है। उन्होंने कहा कि भगवान एक होते हुए भी भक्तों के भाव और प्रेम के अनुरूप विभिन्न रूपों में अवतार लेते हैं। भगवान के अवतार में भक्तों के प्रेम और समर्पण की विशेष भूमिका होती है।

प्रेम और विश्वास से होती है गुरु की पहचान

गुरु के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इन्द्रेश महाराज ने कहा कि केवल किसी के प्रभाव में आकर किसी व्यक्ति को गुरु स्वीकार नहीं करना चाहिए। गुरु वही हैं, जिनसे प्रेम और भाव का संबंध स्थापित हो, जिनके दर्शन से मन को शांति और समाधान मिले तथा जिनके वचन व्यक्ति को भगवान की ओर अग्रसर करें। उन्होंने कहा कि जिस गुरु के चरणों में दृढ़ विश्वास हो और जिनके सान्निध्य में सांसारिक इच्छाएं धीरे-धीरे शांत होने लगें, वही सच्चे अर्थों में गुरु हैं।

कृष्ण जन्मोत्सव पर भक्ति में झूमे श्रद्धालु

कथा के दौरान जैसे ही श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग आया, पूरा पंडाल भक्ति और उल्लास से गूंज उठा। कृष्ण जन्म की बधाइयों के बीच श्रद्धालु जमकर नृत्य करने लगे। इस दौरान पंडाल के कॉरिडोर से गुजरते हुए इन्द्रेश महाराज और सेवादारों ने श्रद्धालुओं के बीच मिठाई, चॉकलेट, टॉफी, खिलौने, माखन-मिश्री का वितरण किया। साथ ही फूलों की वर्षा भी की गई। सोहर और भक्ति गीतों के बीच श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ जन्मोत्सव मनाया।

लगातार बारिश के बावजूद कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। इन्द्रेश महाराज ने बारिश को भगवान इन्द्र की कृपा बताते हुए श्रद्धालुओं के उत्साह की सराहना की। कार्यक्रम में किशोरी जी की छठी और नंदोत्सव का आयोजन भी हर्षोल्लास के साथ किया गया।