सुबह नींद से जागने के बाद भी बिस्तर छोड़ने का मन नहीं करता? बार-बार अलार्म बंद करके थोड़ी देर और सोने की इच्छा होती है? पर्याप्त नींद लेने के बावजूद सिर भारी रहता है या दिनभर उनींदापन और आलस्य महसूस होता है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके पीछे खराब नींद की गुणवत्ता, शरीर में पानी की कमी, पोषण की कमी, शारीरिक निष्क्रियता और तनाव जैसे कई कारण हो सकते हैं।
आज की व्यस्त जीवनशैली में लंबे समय तक बैठकर काम करना, मोबाइल और लैपटॉप का अधिक इस्तेमाल, व्यायाम से दूरी तथा तनाव से निपटने के लिए धूम्रपान या अल्कोहल का सहारा लेना आम होता जा रहा है। ये आदतें न केवल ऊर्जा कम कर सकती हैं, बल्कि लंबे समय में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का जोखिम भी बढ़ा सकती हैं।
1. नींद पूरी होने के बावजूद क्यों रहती है थकान?
सिर्फ सात से आठ घंटे सोना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि नींद की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण है। यदि रात में बार-बार नींद खुलती है या सोने-जागने का समय नियमित नहीं है, तो सुबह उठने पर ताजगी महसूस नहीं हो सकती। शोरगुल वाला वातावरण, असुविधाजनक बिस्तर, सोने से पहले चाय-कॉफी का सेवन और मोबाइल स्क्रीन का अधिक इस्तेमाल भी नींद को प्रभावित कर सकता है।
क्या करें? रोजाना एक निश्चित समय पर सोने और जागने की आदत बनाएं। सोने से पहले स्क्रीन का इस्तेमाल कम करें और कमरे में शांत वातावरण बनाए रखें।
2. शरीर में पानी की कमी भी हो सकती है वजह
शरीर में पानी की कमी होने पर थकान, कमजोरी, सिरदर्द और एकाग्रता में परेशानी महसूस हो सकती है। रातभर पसीना आने, गर्म वातावरण या बीमारी के कारण शरीर में तरल पदार्थों की कमी हो सकती है। पेशाब का रंग हल्का पीला होना सामान्य तौर पर पर्याप्त जल सेवन का संकेत हो सकता है, हालांकि कुछ दवाएं और खाद्य पदार्थ भी इसके रंग को प्रभावित कर सकते हैं।
क्या करें? दिनभर नियमित अंतराल पर पानी पिएं। गर्मी, व्यायाम और शारीरिक जरूरत के अनुसार तरल पदार्थों का सेवन बढ़ाएं।
3. विटामिन की कमी से भी हो सकती है सुस्ती
यदि शरीर को संतुलित आहार नहीं मिलता, तो ऊर्जा की कमी और कमजोरी महसूस हो सकती है। आयरन, विटामिन बी12 और विटामिन डी की कमी भी कुछ लोगों में थकान से जुड़ी हो सकती है। लगातार एक जैसा भोजन करना और फल, सब्जियां, दालें, प्रोटीन तथा अन्य पोषक तत्वों की अनदेखी करना स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है।
क्या करें? भोजन में दालें, साबुत अनाज, हरी सब्जियां, फल, मेवे और प्रोटीन के उचित स्रोत शामिल करें। लगातार थकान रहने पर डॉक्टर की सलाह से आवश्यक जांच कराएं। बिना चिकित्सकीय सलाह के विटामिन सप्लीमेंट लेना शुरू न करें।
4. शारीरिक गतिविधि की कमी से बढ़ सकती है थकान
लंबे समय तक बैठे रहना और नियमित व्यायाम नहीं करना शरीर की सक्रियता तथा नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। इससे दिनभर सुस्ती और काम करने में मन नहीं लगने जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। वयस्कों के लिए सामान्य स्वास्थ्य संबंधी दिशानिर्देश प्रति सप्ताह कम से कम 150 मिनट की मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि की सलाह देते हैं।
क्या करें? रोजाना तेज चाल से चलने, हल्के व्यायाम, योग या अपनी क्षमता के अनुसार शारीरिक गतिविधि करने की आदत बनाएं। शुरुआत कम समय से करके धीरे-धीरे गतिविधि बढ़ाएं।
5. तनाव और मानसिक थकान को न करें नजरअंदाज
लगातार तनाव, चिंता और काम का दबाव नींद को प्रभावित कर सकते हैं। इससे सुबह उठने पर ताजगी की कमी, चिड़चिड़ापन और दिनभर थकान महसूस हो सकती है।
क्या करें? सुबह टहलने जाएं, पसंदीदा संगीत सुनें, अपनी रुचि के कामों के लिए समय निकालें और योग या ध्यान का अभ्यास करें। यदि तनाव लगातार बना रहता है या रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लें।
थकान को सामान्य समझकर न करें अनदेखा
थकान हमेशा खराब दिनचर्या के कारण ही नहीं होती। कभी-कभी यह किसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकती है। एम्स, नई दिल्ली की जन-स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. हर्षल साल्वे के नाम से दिए गए संदर्भ में भी जीवनशैली, नींद और पोषण पर ध्यान देने की बात कही गई है। लगातार कमजोरी या ऊर्जा की कमी के पीछे एनीमिया, थायरॉयड संबंधी समस्याएं, मधुमेह, गुर्दे की बीमारी, कुछ ऑटोइम्यून रोग या नींद संबंधी विकार भी हो सकते हैं। महिलाओं में रजोनिवृत्ति के दौरान भी नींद और ऊर्जा में बदलाव महसूस हो सकते हैं। यदि पर्याप्त नींद और दिनचर्या में सुधार के बावजूद थकान बनी रहती है, तो चिकित्सक से परामर्श लें। जरूरत के अनुसार डॉक्टर रक्त जांच, थायरॉयड जांच या अन्य परीक्षण कराने की सलाह दे सकते हैं।
सुबह की सुस्ती दूर करने के लिए अपनाएं ये आदतें
- सोने और जागने का समय नियमित रखें।
- सोने से पहले मोबाइल और अन्य स्क्रीन का इस्तेमाल कम करें।
- संतुलित भोजन करें और पर्याप्त पानी पिएं।
- रोजाना टहलने, व्यायाम या योग के लिए समय निकालें।
- तनाव कम करने के लिए अपनी पसंद की गतिविधियों को दिनचर्या में शामिल करें।
- धूम्रपान और अल्कोहल से बचें।
- लगातार थकान, अत्यधिक दिन की नींद या तेज खर्राटों के साथ सांस रुकने जैसी समस्या हो, तो डॉक्टर से सलाह लें।
याद रखें: सात से आठ घंटे की नींद के बाद भी लगातार थकान महसूस होना केवल आलस्य नहीं है। अपनी दिनचर्या में सुधार करें और समस्या बनी रहने पर इसके संभावित चिकित्सकीय कारणों की जांच कराएं।


