रायपुर :- छत्तीसगढ़ में हवाला कारोबार को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। रायपुर से नागपुर और मुंबई की ओर ले जाए जा रहे करीब 4 करोड़ रुपये दुर्ग पुलिस द्वारा जब्त किए जाने के बाद रकम के परिवहन और उसके इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि रायपुर की एक ट्रांसपोर्ट कंपनी ने इस रकम को गुजरात में कर्मचारियों के बीच बांटने के लिए भेजे जाने की बात कही है। हालांकि, रकम के स्रोत और उसके वास्तविक उद्देश्य की आधिकारिक पुष्टि जांच के तथ्यों पर निर्भर करेगी।
एक दैनिक अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, रायपुर से रोजाना 60 करोड़ रुपये से अधिक का हवाला कारोबार होने का दावा किया गया है। रिपोर्ट में हवाला कारोबार से जुड़े लोगों के हवाले से बताया गया है कि बड़ी रकम को अलग-अलग तरीकों से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जाता है। इनमें वाहनों के गुप्त चेंबर और अनाज, सब्जी तथा कपड़ों के बीच रकम छिपाकर ले जाने जैसे तरीके शामिल बताए गए हैं।
55 से ज्यादा हवाला कारोबारियों के सक्रिय होने का दावा
रिपोर्ट में कारोबार से जुड़े लोगों के हवाले से रायपुर में 55 से अधिक हवाला कारोबारियों के सक्रिय होने की बात कही गई है। तेलघानी नाका को इस नेटवर्क का प्रमुख केंद्र बताया गया है। हालांकि, इन आंकड़ों और दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि सामने आना जरूरी है।
कमीशन के आधार पर होता है रकम का लेन-देन
हवाला कारोबार से जुड़े लोगों के मुताबिक, रकम के लेन-देन में पहचान के लिए आधे नोट या नोटों के सीरियल नंबर का इस्तेमाल किए जाने का दावा किया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, एक लाख रुपये भेजने पर 1,500 से 2,000 रुपये तक कमीशन लिया जा सकता है। बड़ी रकम के लेन-देन में 2 से 3 प्रतिशत तक कमीशन की बात भी कही गई है।
रिपोर्ट में अलग-अलग राज्यों के लिए कमीशन की दरों में अंतर होने का भी उल्लेख है। झारखंड में एक लाख रुपये भेजने पर 300 से 700 रुपये तक और मुंबई तथा दिल्ली के लिए 1,500 से 2,000 रुपये तक कमीशन लिए जाने का दावा किया गया है।
राजनीतिक दलों से लेकर कारोबार जगत तक नेटवर्क के विस्तार की चर्चा
रिपोर्ट के मुताबिक, हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल राजनीतिक दलों से जुड़े लेन-देन में होने के दावे भी किए जाते हैं। इसके अलावा उद्योग, अनाज मंडी और सराफा कारोबार से जुड़े वित्तीय लेन-देन में भी इस माध्यम के इस्तेमाल की बात कही गई है।
बताया जाता है कि रायपुर से कोलकाता, दिल्ली, मुंबई और गुजरात जैसे शहरों में रकम भेजे जाने के दावे हैं। कुछ कारोबारियों के हवाले से विदेशों तक रकम पहुंचाने की बात भी कही गई है। हालांकि, इन गतिविधियों और किसी विशिष्ट व्यक्ति या संस्था की संलिप्तता की पुष्टि संबंधित जांच और आधिकारिक साक्ष्यों के आधार पर ही की जा सकती है।
अनाज, स्टील और सराफा कारोबार पर भी उठ रहे सवाल
रिपोर्ट में अनाज, आलू, प्याज और चने के कारोबार के साथ-साथ सराफा, स्टील, आयरन, गुटखा और तंबाकू कारोबार में भी हवाला के इस्तेमाल के दावे किए गए हैं। इन दावों के सामने आने के बाद कारोबार में नकदी के परिवहन और वित्तीय लेन-देन की पारदर्शिता को लेकर चर्चा बढ़ गई है।
4 करोड़ रुपये की जब्ती के बाद जांच पर नजर
दुर्ग पुलिस द्वारा करीब 4 करोड़ रुपये जब्त किए जाने का मामला अब रकम के स्रोत, परिवहन के उद्देश्य और संबंधित दस्तावेजों की जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण हो गया है। ट्रांसपोर्ट कंपनी की ओर से गुजरात में कर्मचारियों को भुगतान के लिए रकम भेजने की बात कही गई है। ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि रकम किसकी थी, उसे किस माध्यम से भेजा जा रहा था और क्या उसके साथ जरूरी दस्तावेज मौजूद थे।
फिलहाल, रायपुर में हवाला कारोबार के आकार, सक्रिय कारोबारियों की संख्या और विभिन्न कारोबारी क्षेत्रों से इसके कथित संबंधों को लेकर सामने आए दावों की पुष्टि आधिकारिक जांच और विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर ही की जानी चाहिए।


