दुनिया की दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनी Microsoft ने अपने कर्मचारियों के लिए Voluntary Exit Offer (VEO) यानी स्वैच्छिक नौकरी छोड़ने की योजना शुरू की है। इस पहल के तहत पात्र कर्मचारियों को कंपनी छोड़ने के बदले आर्थिक सहायता और करियर की अगली राह तलाशने में मदद दी जाएगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत समेत चार देशों में कंपनी के करीब 60 हजार कर्मचारी इस योजना के संभावित दायरे में हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सभी कर्मचारियों को नौकरी छोड़नी होगी या सभी इस ऑफर के लिए पात्र होंगे।
माइक्रोसॉफ्ट की एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट और चीफ पीपल ऑफिसर Amy Coleman ने 26 अक्टूबर 2026 को कंपनी के आधिकारिक ब्लॉग पर इस पहल की जानकारी दी। कंपनी के मुताबिक, यह योजना चुनिंदा संगठनों और टीमों के पात्र कर्मचारियों के लिए सीमित समय तक उपलब्ध रहेगी।
किन देशों के कर्मचारियों को मिलेगा ऑफर?
माइक्रोसॉफ्ट की यह योजना भारत, अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा में काम करने वाले पात्र कर्मचारियों के लिए शुरू की गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन चार देशों में लगभग 60 हजार कर्मचारी इसके संभावित दायरे में आते हैं। भारत में माइक्रोसॉफ्ट के करीब 23 हजार कर्मचारी काम करते हैं। हालांकि, कंपनी ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि इनमें से कितने कर्मचारियों को यह ऑफर दिया जाएगा। पात्र कर्मचारियों को ईमेल के जरिए उनकी व्यक्तिगत पात्रता और ऑफर की शर्तों की जानकारी दी जा रही है।
नौकरी छोड़ने पर क्या मिलेंगी सुविधाएं?
Voluntary Exit Offer के तहत कंपनी छोड़ने का विकल्प चुनने वाले कर्मचारियों को आर्थिक सहायता और करियर प्लानिंग से जुड़ी सुविधाएं मिल सकती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पैकेज में कंपनी में पूरे किए गए प्रत्येक वर्ष के लिए एक महीने की बेस सैलरी के बराबर भुगतान, हेल्थ इंश्योरेंस और करियर ट्रांजिशन सर्विस शामिल हो सकती है। हालांकि, वास्तविक भुगतान और अन्य लाभ देश, कर्मचारी की पात्रता तथा व्यक्तिगत ऑफर की शर्तों पर निर्भर करेंगे। करियर ट्रांजिशन सर्विस के जरिए कर्मचारियों को नई नौकरी तलाशने और आगे के करियर की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।
किन कर्मचारियों को मिलेगा Voluntary Exit Offer?
माइक्रोसॉफ्ट के आधिकारिक ब्लॉग के अनुसार, यह योजना भाग लेने वाले संगठनों में लेवल 70 या उससे नीचे के पात्र कर्मचारियों के लिए है। लेकिन कंपनी की हर टीम इस कार्यक्रम में शामिल नहीं है। रिपोर्ट्स में AI Experiences, Copilot, Windows और Devices, Xbox, Finance तथा Human Resources जैसे विभागों की चुनिंदा टीमों का उल्लेख किया गया है। कर्मचारियों की पात्रता संबंधित विभाग की जरूरतों, ग्राहकों के प्रति प्रतिबद्धताओं और वर्कफोर्स की आवश्यकताओं के आधार पर तय होगी। इसलिए केवल किसी विभाग में काम करने या निर्धारित जॉब लेवल पर होने से ऑफर मिलना सुनिश्चित नहीं है। अंतिम जानकारी कंपनी की ओर से भेजे गए व्यक्तिगत ईमेल में दी जाएगी।
1 दिसंबर तक लेना होगा फैसला
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पात्र कर्मचारियों को इस ऑफर को स्वीकार करने या अस्वीकार करने का फैसला 1 दिसंबर 2026 तक लेना होगा। ऑफर स्वीकार करने वाले कर्मचारियों की नौकरी छोड़ने की प्रक्रिया साल के अंत तक पूरी होने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, कर्मचारियों को अपने व्यक्तिगत ऑफर में दी गई समयसीमा और शर्तों को ही अंतिम मानना चाहिए।
Microsoft ने क्यों शुरू की यह योजना?
कंपनी की चीफ पीपल ऑफिसर Amy Coleman के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य उन कर्मचारियों को एक विकल्प देना है, जो माइक्रोसॉफ्ट से बाहर अपना करियर बनाने के बारे में सोच रहे हैं। इसके साथ ही कंपनी को बदलती कारोबारी जरूरतों के अनुसार अपने कर्मचारियों और संसाधनों को व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है। माइक्रोसॉफ्ट ने इसे स्वैच्छिक कार्यक्रम बताया है। कंपनी का कहना है कि वह कर्मचारियों को नए कौशल सीखने और संगठन के भीतर दूसरे अवसर तलाशने में भी मदद करती रहेगी।
भारत में AI और क्लाउड पर निवेश जारी रखेगी कंपनी
स्वैच्छिक एग्जिट ऑफर के बीच माइक्रोसॉफ्ट ने भारत में अपने निवेश को लेकर भी प्रतिबद्धता दोहराई है। कंपनी के मुताबिक, वह 2025 से 2029 के बीच भारत में क्लाउड, AI इंफ्रास्ट्रक्चर, स्किलिंग और ऑपरेशंस के लिए 20.5 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जता चुकी है। इसके अलावा, कंपनी का लक्ष्य 2030 तक भारत में 2 करोड़ लोगों को AI कौशल से लैस करना है। इस तरह, एक ओर माइक्रोसॉफ्ट पात्र कर्मचारियों को स्वेच्छा से बाहर जाने का विकल्प दे रही है, वहीं दूसरी ओर भारत के टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम में निवेश जारी रखने की बात भी कह रही है।
क्या यह माइक्रोसॉफ्ट में छंटनी है?
माइक्रोसॉफ्ट की Voluntary Exit Offer योजना को अनिवार्य छंटनी से अलग समझना जरूरी है। इसमें पात्र कर्मचारियों को कंपनी छोड़ने का विकल्प दिया जाता है, जबकि छंटनी में कंपनी की ओर से नौकरी समाप्त की जाती है। फिलहाल, इस योजना के तहत कितने भारतीय कर्मचारी ऑफर स्वीकार करेंगे, इसकी आधिकारिक संख्या सामने नहीं आई है। कर्मचारियों के लिए वास्तविक लाभ और पात्रता की जानकारी उनके व्यक्तिगत ऑफर पर निर्भर करेगी। माइक्रोसॉफ्ट की यह पहल कर्मचारियों को करियर में बदलाव का विकल्प देने के साथ कंपनी को अपनी बदलती कारोबारी जरूरतों के अनुरूप वर्कफोर्स व्यवस्थित करने का अवसर देती है। भारत में इस योजना का वास्तविक असर पात्र कर्मचारियों की संख्या और ऑफर स्वीकार करने वालों के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगा।


