नई दिल्ली :- कई लोग सोते समय खर्राटे लेते हैं और इसे एक सामान्य आदत समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर खर्राटे तेज हों और उनके साथ बार-बार सांस रुकने या हांफने जैसी समस्या भी हो, तो यह गंभीर स्लीप डिसऑर्डर का संकेत हो सकता है। इस स्थिति को ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया कहा जाता है। यह समस्या नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करने के साथ-साथ हृदय और दिमाग की सेहत पर भी असर डाल सकती है।
क्या है ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया?
ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें सोते समय सांस लेने का रास्ता बार-बार संकरा या अवरुद्ध हो जाता है। इसके कारण सांस कुछ समय के लिए रुक सकती है और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम हो सकता है। रातभर ऐसा बार-बार होने से नींद बाधित होती है और शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इस समस्या से पीड़ित व्यक्ति को तेज खर्राटे आने, नींद में घुटन महसूस होने, अचानक हांफकर उठने और दिन में अत्यधिक नींद आने जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
स्लीप एपनिया से कैसे बढ़ सकता है स्ट्रोक का खतरा?
स्लीप एपनिया के दौरान बार-बार ऑक्सीजन का स्तर कम होना और नींद में खलल पड़ना शरीर की सामान्य प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकता है। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ने, रक्त वाहिकाओं के कामकाज में गड़बड़ी और हृदय की धड़कन अनियमित होने का खतरा बढ़ सकता है। लंबे समय तक यह समस्या बनी रहने पर हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। स्ट्रोक भी इससे जुड़े संभावित स्वास्थ्य जोखिमों में शामिल है।
स्ट्रोक तब होता है, जब दिमाग के किसी हिस्से तक रक्त की आपूर्ति बाधित हो जाती है या मस्तिष्क की रक्त वाहिका फट जाती है। स्लीप एपनिया को स्ट्रोक के बढ़े हुए जोखिम से जोड़कर देखा गया है, हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि खर्राटे लेने वाले हर व्यक्ति को स्ट्रोक होगा।
स्टडी में सामने आया स्ट्रोक के खतरे से जुड़ा तथ्य
अमेरिकन जर्नल ऑफ रेस्पिरेटरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन के हवाले से स्लीप एपनिया से पीड़ित पुरुषों में इस्केमिक स्ट्रोक का खतरा बिना इस समस्या वाले पुरुषों की तुलना में तीन गुना तक अधिक बताया गया है। हालांकि, किसी भी अध्ययन के नतीजों को समझते समय उसके प्रतिभागियों, अध्ययन की अवधि और अन्य जोखिम कारकों को ध्यान में रखना जरूरी है। किसी व्यक्ति का वास्तविक जोखिम उसकी उम्र, ब्लड प्रेशर, वजन, मधुमेह और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों पर भी निर्भर करता है।
इन 5 लक्षणों को न करें नजरअंदाज
अगर सोते समय या सुबह उठने के बाद ये लक्षण दिखाई देते हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
1. तेज और लगातार खर्राटे : हर रात तेज खर्राटे आना, खासकर जब इससे दूसरों की नींद भी प्रभावित हो।
2. सोते समय सांस रुकना : परिवार के किसी सदस्य का नींद में सांस रुकने या फिर अचानक शुरू होने की शिकायत करना।
3. हांफकर उठना : रात में घुटन महसूस होना या अचानक सांस लेने के लिए उठ जाना।
4. सुबह सिरदर्द : जागने के बाद बार-बार सिरदर्द या तरोताजा महसूस न होना।
5. दिन में ज्यादा नींद आना : पर्याप्त समय सोने के बावजूद दिनभर थकान, सुस्ती या नींद महसूस होना।
ध्यान रखें कि केवल खर्राटे आने का मतलब स्लीप एपनिया होना नहीं है। इसकी पुष्टि के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
स्लीप एपनिया से बचाव और इलाज के लिए क्या करें?
स्लीप एपनिया के लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से जांच कराना सबसे जरूरी कदम है। जरूरत पड़ने पर स्लीप स्टडी के जरिए नींद के दौरान सांस लेने की स्थिति का आकलन किया जा सकता है। इसके अलावा, वजन को स्वस्थ सीमा में रखना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना, शराब से बचना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार सोने की आदतों में बदलाव करना मददगार हो सकता है। कुछ मरीजों को इलाज के लिए सीपीएपी (CPAP) मशीन की सलाह दी जाती है, जो सोते समय सांस का रास्ता खुला रखने में मदद करती है। इलाज का चुनाव बीमारी की गंभीरता और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार किया जाता है।
कब तुरंत मेडिकल सहायता लेनी चाहिए?
यदि किसी व्यक्ति को अचानक चेहरे, हाथ या पैर में कमजोरी, बोलने में परेशानी, देखने में बदलाव या संतुलन बिगड़ने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो यह स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
खर्राटों को हमेशा सामान्य आदत समझकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। खासकर जब उनके साथ सांस रुकने, हांफने या दिन में अत्यधिक नींद आने जैसे लक्षण हों, तो स्लीप एपनिया की जांच कराना जरूरी है। समय पर पहचान और सही इलाज से स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है।


