गरियाबंद :- छत्तीसगढ़ में चक्रवाती तूफान अर्नब का असर अब किसानों पर भारी पड़ने लगा है। धान खरीदी शुरू होने से पहले ही किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। गरियाबंद जिले के देवभोग क्षेत्र में लगातार बारिश और खेतों में जलभराव के चलते हजारों एकड़ में लगी धान की फसल बर्बाद होने के कगार पर पहुंच गई है। हालात ऐसे हैं कि खेतों में पककर तैयार धान की फसल पानी में डूब गई है और कई जगह पौधे जमीन पर बिछ गए हैं।

20 से अधिक गांवों में धान की फसल प्रभावित

साइक्लोन अर्नब के प्रभाव से देवभोग तहसील के सिनापाली, बाड़ीगांव, गिरशुल और झाखरपारा क्षेत्र के 20 से अधिक गांवों में फसलों को नुकसान पहुंचने की खबर है। खेतों में पानी भरने से पकी हुई धान की बालियां डूब गई हैं। ऐसे में किसानों के सामने अपनी फसल को सड़ने से बचाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। सिनापाली गांव की तस्वीरें किसानों की बेबसी बयां कर रही हैं। यहां किसान घुटने भर पानी में उतरकर धान के पौधों को कपड़े की रस्सी से बांधकर सीधा खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि पानी में डूबी बालियां सड़ने से बच सकें।

तीन दिन तक पानी में डूबी रही फसल तो बढ़ेगा नुकसान

किसान दुर्बल राम, खिरसिंधु और हरिराम के मुताबिक, सबसे ज्यादा खतरा दूध भर रही धान की फसल को है। अगर फसल तीन दिन से ज्यादा समय तक पानी में डूबी रही तो धान खराब होने की आशंका है। वहीं, पककर तैयार हो चुकी फसल के पौधों के सड़ने का खतरा भी बढ़ गया है। किसान एक-एक पौधे को बचाने में जुटे हैं। उन्हें चिंता है कि अगर समय रहते खेतों से पानी नहीं निकला तो खाद, बीज और खेती में लगाई गई पूरी लागत डूब सकती है।

मक्का, सब्जी और दलहन की फसलें भी प्रभावित

चक्रवाती तूफान अर्नब का असर सिर्फ धान तक सीमित नहीं है। क्षेत्र में मक्का, सब्जी और दलहन की फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। खेतों और बाड़ियों में पानी भरने से सब्जियां खराब होने लगी हैं। वहीं, बाजार बंद होने के कारण सब्जी उत्पादकों के सामने अपनी उपज बेचने का संकट खड़ा हो गया है। पिछले दो दिनों में सब्जियों की गुणवत्ता भी प्रभावित होने लगी है। ऐसे में किसान मजबूरी में अपने घरों के सामने ही दुकान लगाकर सब्जियां बेच रहे हैं, ताकि कुछ लागत वसूल हो सके।

नुकसान का सर्वे कराएगा प्रशासन, मुआवजे का प्रावधान

इधर, किसानों की परेशानी को देखते हुए प्रशासन ने नुकसान का आकलन कराने की बात कही है। देवभोग तहसीलदार सुशील कुमार भोई के मुताबिक, तूफान के कारण क्षेत्र में काफी नुकसान हुआ है। प्रभावित किसानों की फसलों का सर्वे कराया जाएगा।उन्होंने बताया कि फसल में 33 प्रतिशत या उससे अधिक नुकसान होने पर आरबीसी 6-4 के तहत क्षतिपूर्ति का प्रावधान है। इसके लिए प्रभावित किसानों को विधिवत आवेदन देना होगा। आवेदन और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा। फिलहाल देवभोग क्षेत्र के किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती खेतों में भरे पानी से अपनी बची हुई फसल को बचाने की है। धान खरीदी से ठीक पहले आई इस प्राकृतिक आफत ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। अब सभी की नजर प्रशासनिक सर्वे और मिलने वाली राहत पर टिकी है।