रायपुर :- राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर 2026 को प्रस्तावित कांग्रेस की ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ महारैली को लेकर छत्तीसगढ़ में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इस महारैली को सफल बनाने और प्रदेश से बड़ी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस संगठन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। पार्टी ने छत्तीसगढ़ से 5 हजार से अधिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को दिल्ली पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए 30 से ज्यादा लग्जरी बसें बुक की गई हैं। कांग्रेस की कोशिश है कि प्रदेश के सभी प्रमुख जिलों से कार्यकर्ता बड़ी संख्या में इस राष्ट्रीय आयोजन में शामिल हों और रामलीला मैदान में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं।

दरअसल, कांग्रेस ने महारैली में शामिल होने वाले कार्यकर्ताओं को दिल्ली पहुंचाने के लिए पहले रेलवे से विशेष ट्रेन की मांग की थी। पार्टी की योजना थी कि ट्रेन के माध्यम से एक साथ बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को राष्ट्रीय राजधानी पहुंचाया जाए, लेकिन विशेष ट्रेन की मांग पूरी नहीं होने के बाद कांग्रेस ने सड़क मार्ग का विकल्प चुना है। अब प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से कार्यकर्ताओं को बसों के जरिए दिल्ली ले जाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए बसों की बुकिंग के साथ यात्रा मार्ग, कार्यकर्ताओं के समूह और उनके आपसी समन्वय पर भी ध्यान दिया जा रहा है। लंबी दूरी की यात्रा को देखते हुए पार्टी के सामने समय पर सभी कार्यकर्ताओं को दिल्ली पहुंचाने की चुनौती भी है।

कांग्रेस की यह महारैली राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ के नारे के साथ पार्टी चुनावी प्रक्रिया, मतदाताओं के अधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की तैयारी में है। कांग्रेस का आरोप है कि देश में चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसे में पार्टी इस महारैली के जरिए इन मुद्दों पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग का ध्यान आकर्षित करना चाहती है। कार्यक्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, विभिन्न राज्यों के प्रदेश पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं के शामिल होने की संभावना है।

छत्तीसगढ़ के अलावा देश के कई अन्य राज्यों में भी महारैली को लेकर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हिमाचल प्रदेश से कार्यकर्ताओं को दिल्ली पहुंचाने के लिए 156 बसों की व्यवस्था की गई है। वहीं झारखंड, तेलंगाना और कर्नाटक से भी बसों के जरिए कार्यकर्ताओं को राष्ट्रीय राजधानी भेजने की तैयारी चल रही है। इन राज्यों में भी विशेष ट्रेन की मांग पूरी नहीं होने के बाद सड़क परिवहन को प्राथमिकता दी गई है। अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के पहुंचने से रामलीला मैदान में कांग्रेस का बड़ा शक्ति प्रदर्शन देखने को मिल सकता है।

छत्तीसगढ़ कांग्रेस के लिए 5 हजार से अधिक कार्यकर्ताओं को दिल्ली पहुंचाना संगठनात्मक स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी है। 30 से ज्यादा लग्जरी बसों की बुकिंग के बावजूद निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के लिए अतिरिक्त परिवहन व्यवस्था की जरूरत पड़ सकती है। पार्टी को कार्यकर्ताओं की संख्या के अनुसार बसों का इंतजाम, यात्रा के दौरान सुरक्षा, भोजन और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था भी करनी होगी। इसके साथ ही अलग-अलग जिलों से आने वाले कार्यकर्ताओं को निर्धारित स्थानों पर एकत्रित कर समय पर रवाना करने की योजना बनाई जा रही है। महारैली में प्रदेश के किन-किन वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों की भागीदारी रहेगी, इसे लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा है।

बहरहाल, 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ महारैली को कांग्रेस अपने राष्ट्रीय राजनीतिक अभियान के अहम आयोजन के रूप में देख रही है। छत्तीसगढ़ से 5 हजार से अधिक कार्यकर्ताओं को शामिल करने का लक्ष्य बताता है कि पार्टी इस आयोजन में प्रदेश की मजबूत भागीदारी दिखाना चाहती है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि कांग्रेस अपने निर्धारित लक्ष्य के मुताबिक कितने कार्यकर्ताओं को दिल्ली पहुंचा पाती है और महारैली के मंच से पार्टी नेतृत्व चुनावी प्रक्रिया, मतदाता अधिकारों और लोकतंत्र को लेकर क्या राजनीतिक संदेश देता है।