नई दिल्ली :- कनाडा जाने का सपना देख रहे भारतीयों के लिए बड़ी खबर है। कनाडा सरकार ने फर्जी और अनधिकृत इमिग्रेशन एजेंटों के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। 28 अक्टूबर 2026 से नए नियम लागू कर दिए गए हैं। इसके तहत इमिग्रेशन और नागरिकता से जुड़ी सेवाओं में धोखाधड़ी करने वाले प्रतिनिधियों पर 15 लाख कनाडाई डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। खास बात यह है कि ये नियम केवल कनाडा में काम करने वाले एजेंटों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भारत सहित दूसरे देशों में बैठकर पैसे लेकर इमिग्रेशन सलाह देने वाले अनधिकृत एजेंट भी इसके दायरे में आएंगे।
कनाडा के इमिग्रेशन, रिफ्यूजीज एंड सिटिजनशिप कनाडा (IRCC) के मुताबिक, बिना अधिकृत अनुमति के पैसे लेकर इमिग्रेशन या नागरिकता संबंधी सलाह देने और किसी आवेदक का प्रतिनिधित्व करने पर 5,000 कनाडाई डॉलर का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं, किसी आवेदक की ओर से जानबूझकर गलत या भ्रामक जानकारी देने अथवा ऐसा करने में मदद करने पर 15,000 कनाडाई डॉलर तक का जुर्माना हो सकता है। बार-बार नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माने की राशि बढ़ सकती है।
नई व्यवस्था केवल फर्जी एजेंटों पर ही नहीं, बल्कि लाइसेंस प्राप्त इमिग्रेशन सलाहकारों, वकीलों और अन्य अधिकृत प्रतिनिधियों पर भी लागू होगी। यदि कोई अधिकृत प्रतिनिधि इमिग्रेशन आवेदन में गलत जानकारी देता है या नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। गंभीर और बार-बार होने वाले उल्लंघनों के मामलों में कुल आर्थिक दंड 15 लाख कनाडाई डॉलर तक पहुंच सकता है।
कनाडा सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिनिधियों के नाम और उनके द्वारा किए गए उल्लंघन का विवरण सार्वजनिक किया जाएगा। इसके लिए IRCC की ओर से ऑनलाइन सार्वजनिक रजिस्ट्री शुरू करने की तैयारी है, जिसके 2027 में शुरू होने की उम्मीद है। इससे कनाडा जाने की तैयारी कर रहे लोगों को फर्जी और धोखाधड़ी करने वाले एजेंटों की पहचान करने में मदद मिलेगी।
सरकार ने कनाडा में पढ़ाई, नौकरी या स्थायी निवास (PR) के लिए आवेदन करने वाले लोगों को सलाह दी है कि किसी भी इमिग्रेशन एजेंट या सलाहकार को पैसे देने से पहले उसकी आधिकारिक मान्यता और लाइसेंस की जांच जरूर करें। आवेदकों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके आवेदन में दी गई सभी जानकारियां सही हों। सरकार का कहना है कि इन नियमों का मुख्य उद्देश्य इमिग्रेशन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना और आवेदकों को धोखाधड़ी व आर्थिक शोषण से बचाना है।


