नई दिल्ली :- दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में रविवार को कांग्रेस के नेतृत्व में INDIA गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बड़ा राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन किया। 'वोट चोरी' और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर आयोजित इस महारैली में कांग्रेस समेत गठबंधन के कई प्रमुख दलों के नेता शामिल हुए। रैली के दौरान विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।
राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA गठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कनॉट प्लेस-मिंटो रोड जंक्शन से रामलीला मैदान तक मार्च निकाला। इस दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पार्टी के झंडे और पोस्टर लेकर पहुंचे। रैली में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती समेत कई विपक्षी नेता मौजूद रहे।
राहुल गांधी का बड़ा हमला, बोले- ज्ञानेश कुमार को हटाना पहला कदम
रामलीला मैदान में जनसभा को संबोधित करते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं और इससे देश के नागरिकों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ा है। राहुल गांधी ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से हटाना देश को सही रास्ते पर लाने की दिशा में पहला कदम होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी निशाने पर लेते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार के बाद उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राहुल गांधी ने कथित वोट चोरी को आम चोरी नहीं, बल्कि देश के नागरिकों की आवाज और उनके अधिकारों की चोरी बताते हुए इसे लोकतंत्र के साथ विश्वासघात करार दिया।
ममता बनर्जी ने SIR को लेकर चुनाव आयोग पर साधा निशाना
रैली में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी चुनाव आयोग और बीजेपी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान एक करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जाने का दावा किया। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के जरिए राजनीतिक रूप से चुनिंदा मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर पीछे हटने वाला नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि INDIA गठबंधन लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई जारी रखेगा और किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेगा।
खरगे और अखिलेश यादव ने भी उठाए सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने रैली को ऐतिहासिक बताते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार अपने पद से नहीं हटते, विपक्ष का संघर्ष जारी रहेगा।वहीं, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने भी चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और मतदाताओं के अधिकारों का मुद्दा उठाया। INDIA गठबंधन के नेताओं ने एकजुट होकर चुनाव आयोग की जवाबदेही तय करने की मांग की।
बीजेपी का पलटवार, रैली को बताया राजनीतिक ड्रामा
विपक्ष की महारैली के बाद बीजेपी ने भी कांग्रेस और INDIA गठबंधन पर हमला बोला। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने इस प्रदर्शन को लोकतंत्र के सम्मान के बजाय देश में अराजकता फैलाने की सोची-समझी साजिश करार दिया। वहीं, बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने रैली में भीड़ को लेकर कांग्रेस के दावों पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि रामलीला मैदान का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा खाली था। पात्रा ने कांग्रेस नेताओं के 10 लाख लोगों के जुटने के दावे को भी चुनौती दी। इस तरह रैली के बाद बीजेपी और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है।
मतदाता सूची में बदलाव बना सियासी टकराव की बड़ी वजह
दरअसल, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत देशभर में 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया से बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के मतदान अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को दुरुस्त करने के लिए यह प्रक्रिया की जा रही है, जिसमें डुप्लीकेट और अपात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं। आयोग के मुताबिक, जिन पात्र मतदाताओं के नाम गलती से हट गए हैं, वे दोबारा नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
आगे भी जारी रह सकता है राजनीतिक टकराव
रामलीला मैदान की इस महारैली के बाद साफ है कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मुद्दा आने वाले दिनों में भी देश की राजनीति के केंद्र में रहने वाला है। कांग्रेस और INDIA गठबंधन ने इस मुद्दे पर अपना आंदोलन जारी रखने के संकेत दिए हैं, जबकि बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। अब देखना होगा कि विपक्ष की इस एकजुटता और राजनीतिक दबाव का आगे क्या असर पड़ता है और चुनाव आयोग इन आरोपों पर किस तरह अपना पक्ष रखता है।


