नई दिल्ली :- नवंबर का महीना शुरू होते ही मौसम में बदलाव देखने को मिलने लगता है। तापमान में गिरावट और हवा में बढ़ते प्रदूषण के कारण कई लोगों को छींक, नाक बहने, बंद नाक और आंखों में खुजली जैसी समस्याएं होने लगती हैं। अक्सर लोग इसे सामान्य सर्दी-जुकाम समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह विंटर एलर्जी के लक्षण भी हो सकते हैं।

सर्दियों में हवा में मौजूद धूल, स्मॉग, PM2.5 कण और घर के अंदर पनपने वाली फफूंद एलर्जी की समस्या को बढ़ा सकती है। जिन लोगों को पहले से एलर्जी या अस्थमा की परेशानी है, उन्हें इस मौसम में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। आइए जानते हैं सर्दियों में एलर्जी क्यों बढ़ती है और इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए।

सर्दियों में एलर्जी बढ़ने के दो बड़े कारण

1. स्मॉग और PM2.5 से बढ़ती परेशानी

सर्दियों के दौरान कई शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। हवा में मौजूद स्मॉग और PM2.5 के बेहद छोटे कण सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। ये कण श्वसन तंत्र को प्रभावित करते हैं और नाक में जलन, छींक, खांसी तथा सांस संबंधी परेशानियां बढ़ा सकते हैं। PM2.5 कणों का आकार 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। इनका छोटा आकार इन्हें फेफड़ों के भीतर तक पहुंचने में सक्षम बनाता है। पहले से एलर्जी या सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए प्रदूषित हवा अधिक परेशानी पैदा कर सकती है।

2. बदलता तापमान और घर के अंदर मौजूद एलर्जी के कारण

सर्दियों में लोग ज्यादातर समय घर के अंदर बिताते हैं। इस दौरान धूल, धूल के कण, कॉकरोच और फफूंद जैसे एलर्जी पैदा करने वाले तत्वों के संपर्क में आने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा, हीटर के इस्तेमाल और घर के अंदर-बाहर के तापमान में बदलाव से कुछ लोगों में नाक और सांस संबंधी परेशानी बढ़ सकती है। ऐसे में बार-बार छींक आना, नाक बहना और आंखों में खुजली जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

किन लोगों को विंटर एलर्जी का ज्यादा खतरा?

जिन लोगों को पहले से एलर्जी, एलर्जिक राइनाइटिस या अस्थमा की समस्या है, उन्हें सर्दियों में अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।इसके अलावा धूल, फफूंद और पालतू जानवरों के संपर्क से एलर्जी वाले लोगों की परेशानी भी बढ़ सकती है। कुछ लोगों में एलर्जी की प्रवृत्ति आनुवंशिक भी हो सकती है। एलर्जी से जुड़े मामलों में IgE और ईोसिनोफिल जैसे संकेतकों की भूमिका हो सकती है, लेकिन इनका बढ़ा हुआ स्तर अपने आप किसी बीमारी की पुष्टि नहीं करता। इसके लिए डॉक्टर की सलाह और जरूरी जांच महत्वपूर्ण हैं।

विंटर एलर्जी से बचने के लिए अपनाएं ये 6 तरीके

1. घर की नियमित सफाई करें :- घर में धूल जमा न होने दें। कालीन, पर्दे, सोफे और बिस्तर की नियमित सफाई करें। संभव हो तो HEPA फिल्टर वाले वैक्यूम क्लीनर का इस्तेमाल करें।

2. पुराने अखबार और रद्दी हटाएं :- घर में पुराने कागजों और अखबारों का ढेर न लगाएं। इनमें धूल जमा हो सकती है, जिससे एलर्जी की समस्या बढ़ सकती है।

3. एयर फिल्टर साफ रखें :- रूम हीटर और एयर प्यूरीफायर के फिल्टर की नियमित सफाई और जरूरत के अनुसार बदलाव करें।

4. फफूंद से बचाव करें :- बाथरूम, रसोई और घर की नम दीवारों पर फफूंद न जमने दें। नमी को नियंत्रित रखें और फफूंद की समस्या होने पर उचित तरीके से सफाई कराएं।

5. पालतू जानवरों से सावधानी रखें :- अगर आपको पालतू जानवरों से एलर्जी है, तो उनके साथ नजदीकी संपर्क सीमित रखें और घर की सफाई का विशेष ध्यान दें।

6. सेहत और टीकाकरण का ध्यान रखें :- संतुलित खानपान अपनाएं और पर्याप्त नींद लें। फ्लू और निमोनिया से बचाव के टीके की जरूरत के बारे में डॉक्टर से सलाह लें।

कब डॉक्टर के पास जाना जरूरी है?

अगर लगातार छींक आ रही है, नाक बहने या बंद रहने की समस्या ठीक नहीं हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लें। इसके अलावा बुखार, लगातार खांसी या बलगम में बदलाव होने पर भी चिकित्सकीय जांच जरूरी हो सकती है। अगर सांस लेने में परेशानी, सीने में जकड़न या सांस फूलने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें। सर्दियों में होने वाली हर छींक सामान्य सर्दी-जुकाम नहीं होती। कई बार इसके पीछे एलर्जी और प्रदूषण भी कारण हो सकते हैं। इसलिए लक्षणों को समझना, घर की सफाई रखना और समय पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।