नई दिल्ली :- महिलाओं में होने वाली PCOS यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम की समस्या सिर्फ हार्मोन और प्रजनन स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर शरीर के मेटाबॉलिज्म, मानसिक स्वास्थ्य और पाचन तंत्र पर भी पड़ सकता है। अब एम्स के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन में योग की संभावित भूमिका को लेकर अहम जानकारी दी है। शोध के मुताबिक, नियमित योग शरीर में सूजन, ऑक्सीडेटिव तनाव और तनाव से जुड़ी समस्याओं को कम करने में मदद कर सकता है। इससे आंतों की सेहत और शरीर के हार्मोनल संतुलन को भी फायदा मिलने की संभावना है।

हालांकि, शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि योग और आंतों के सूक्ष्मजीवों के बीच संबंध को साबित करने के लिए अभी और चिकित्सकीय अध्ययनों की जरूरत है। आइए जानते हैं इस शोध में क्या सामने आया है और PCOS से जूझ रही महिलाओं के लिए योग किस तरह मददगार हो सकता है।

एम्स की रिसर्च में योग को लेकर क्या सामने आया?

एम्स के शरीर रचना विज्ञान विभाग और आणविक प्रजनन प्रयोगशाला की डॉ. रीमा दादा और डॉ. दीपिका कुमारी ने इस विषय पर शोधपत्र तैयार किया है। यह शोधपत्र इंटरनेशनल जर्नल ऑफ प्रिवेंटिव मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है। शोधपत्र का शीर्षक है, 'पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम में आंतों के सूक्ष्मजीवों के असंतुलन को सुधारने में योग की संभावित भूमिका'। शोधकर्ताओं के मुताबिक, योग शरीर में तनाव की प्रतिक्रिया, सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव को प्रभावित कर सकता है। इसका सकारात्मक असर आंतों के स्वास्थ्य पर पड़ने की संभावना है।

PCOS क्या है और महिलाओं के शरीर पर कैसे डालता है असर?

PCOS महिलाओं में होने वाला एक हार्मोनल और मेटाबॉलिक विकार है। इसमें शरीर में एंड्रोजन यानी पुरुष हार्मोन का स्तर बढ़ सकता है। इसके अलावा इंसुलिन प्रतिरोध और लंबे समय तक हल्की सूजन जैसी समस्याएं भी देखने को मिल सकती हैं। इसका असर महिलाओं के मासिक धर्म चक्र, ओव्यूलेशन और प्रजनन क्षमता पर पड़ सकता है। कुछ महिलाओं में वजन बढ़ना, मुंहासे और चेहरे पर अनचाहे बालों की समस्या भी देखी जाती है। समय पर पहचान और उचित उपचार नहीं होने पर PCOS के साथ टाइप-2 डायबिटीज, फैटी लिवर और हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है।

आंतों के बैक्टीरिया का हार्मोनल स्वास्थ्य से क्या संबंध?

शोधकर्ताओं के अनुसार, आंतों में मौजूद लाभकारी बैक्टीरिया और दूसरे सूक्ष्मजीव शरीर की सेहत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके संतुलन में गड़बड़ी होने पर शरीर का मेटाबॉलिज्म, रोग प्रतिरोधक क्षमता और हार्मोनल नियंत्रण प्रभावित हो सकता है। आंतों में मौजूद सूक्ष्मजीव कई ऐसे पदार्थ बनाते हैं, जो शरीर में सूजन और मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने में भूमिका निभाते हैं। PCOS में इन सूक्ष्मजीवों के संतुलन में बदलाव भी बीमारी से जुड़ा हो सकता है।

गट-ब्रेन एक्सिस क्या है? योग से कैसे मिल सकता है फायदा?

शोध में गट-ब्रेन एक्सिस यानी आंत और मस्तिष्क के बीच होने वाले संवाद को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। यह तंत्रिका तंत्र, हार्मोन और प्रतिरक्षा प्रणाली के माध्यम से काम करता है। लगातार तनाव रहने पर शरीर का सहानुभूति तंत्रिका तंत्र अधिक सक्रिय हो सकता है। इसका असर आंतों में रक्त प्रवाह, मल त्याग और पाचन प्रक्रिया पर पड़ सकता है। वहीं योग पैरासिम्पथेटिक तंत्रिका तंत्र की सक्रियता को बढ़ावा दे सकता है। यह शरीर को आराम की स्थिति में लाने और सामान्य पाचन क्रिया बनाए रखने में मदद करता है। इससे तनाव कम करने और आंतों के अनुकूल वातावरण बनाने में संभावित फायदा मिल सकता है।

आसन, प्राणायाम और ध्यान से मिल सकते हैं ये फायदे

शोधपत्र में योग के तीन प्रमुख हिस्सों को महत्वपूर्ण बताया गया है।

आसन :- शारीरिक सक्रियता बढ़ाने और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।

प्राणायाम :- सांसों को नियंत्रित करने के अभ्यास तनाव कम करने में सहायक हो सकते हैं।

ध्यान :- मानसिक तनाव और शरीर की तनाव प्रतिक्रिया को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।

पिछले अध्ययनों में योग को इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार, तनाव हार्मोन में कमी और सूजन से जुड़े कुछ संकेतकों में सकारात्मक बदलाव से जोड़ा गया है।

क्या योग से PCOS पूरी तरह ठीक हो सकता है?

शोधकर्ताओं ने योग को PCOS के संभावित सहायक उपाय के रूप में देखा है। हालांकि, अभी यह कहना सही नहीं होगा कि केवल योग करने से PCOS पूरी तरह ठीक हो सकता है। योग के आंतों के सूक्ष्मजीवों पर वास्तविक प्रभाव और महिलाओं के हार्मोनल व मेटाबॉलिक स्वास्थ्य में इससे होने वाले सुधार को समझने के लिए बड़े और व्यवस्थित चिकित्सकीय अध्ययनों की जरूरत है। PCOS से पीड़ित महिलाओं को डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार, संतुलित खानपान, नियमित शारीरिक गतिविधि और पर्याप्त नींद पर ध्यान देना चाहिए। योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना भी बेहतर है।