हिंदू धर्म में धनतेरस का पर्व सुख-समृद्धि, धन-वैभव और आरोग्य का प्रतीक माना जाता है। दीपावली के पांच दिवसीय महापर्व की शुरुआत भी इसी दिन से होती है। हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाने वाला यह त्योहार धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास माना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, धन के देवता भगवान कुबेर, मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर सोना-चांदी, नए बर्तन, आभूषण और अन्य शुभ वस्तुओं की खरीदारी करने से घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य का आगमन होता है। यही वजह है कि इस दिन बाजारों में खरीदारी को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिलता है। साल 2026 में धनतेरस का पर्व 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस बार ज्योतिषीय गणना के अनुसार कई शुभ समय और चौघड़िया मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे। ऐसे में यदि आप भी धनतेरस पर सोना-चांदी, बर्तन, वाहन या अन्य शुभ वस्तुओं की खरीदारी करने की योजना बना रहे हैं, तो पूजा और खरीदारी का शुभ समय जानना आपके लिए महत्वपूर्ण है।

धनतेरस 2026: कब शुरू होगी त्रयोदशी तिथि?

हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह लगभग 9 बजकर 30 मिनट से प्रारंभ होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 7 नवंबर को सुबह 11 बजकर 45 मिनट पर होगा। उदया तिथि और पर्व की धार्मिक परंपराओं के अनुसार धनतेरस का त्योहार 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा के साथ मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की आराधना करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि विधि-विधान से पूजा करने और शुभ मुहूर्त में खरीदारी करने से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।

धनतेरस 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त

धनतेरस के दिन प्रदोष काल और वृषभ काल में पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार, 6 नवंबर को पूजा के लिए शाम का समय शुभ रहेगा।

धनतेरस पूजा मुहूर्त : शाम 6:19 बजे से रात 8:17 बजे तक।

प्रदोष काल : शाम 5:49 बजे से रात 8:23 बजे तक।

वृषभ काल : शाम 6:19 बजे से रात 8:17 बजे तक।

इसी अवधि में श्रद्धालु भगवान धन्वंतरि, भगवान कुबेर, मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर सकते हैं। इस दौरान घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल पर दीपक जलाने की भी परंपरा है।

धनतेरस पर खरीदारी के लिए दिन का चौघड़िया मुहूर्त

धनतेरस के दिन सोना-चांदी, बर्तन और अन्य शुभ वस्तुओं की खरीदारी के लिए चौघड़िया मुहूर्त का विशेष महत्व माना जाता है। दिन के अलग-अलग समय में चर, लाभ, अमृत और शुभ चौघड़िया उपलब्ध रहेंगे।

  • दिन का चौघड़िया चर: सुबह 6 बजकर 32 मिनट से 7 बजकर 54 मिनट तक
  • लाभ: सुबह 7 बजकर 54 मिनट से 9 बजकर 16 मिनट तक
  • अमृत: सुबह 9 बजकर 16 मिनट से 10 बजकर 38 मिनट तक
  • काल: सुबह 10 बजकर 38 मिनट से दोपहर 12 बजकर 1 मिनट तक
  • शुभ: दोपहर 12 बजकर 1 मिनट से 1 बजकर 23 मिनट तक
  • रोग: दोपहर 1 बजकर 23 मिनट से 2 बजकर 45 मिनट तक
  • उद्वेग: दोपहर 2 बजकर 45 मिनट से शाम 4 बजकर 7 मिनट तक
  • चर: शाम 4 बजकर 7 मिनट से 5 बजकर 30 मिनट तक

धनतेरस 2026: रात का चौघड़िया मुहूर्त

दिन के अलावा रात में भी खरीदारी और शुभ कार्यों के लिए चौघड़िया मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे। रात के समय लाभ, शुभ और अमृत चौघड़िया को विशेष रूप से देखा जाता है।

  • रात का चौघड़ियारोग: शाम 5 बजकर 30 मिनट से 7 बजकर 8 मिनट तक
  • काल: शाम 7 बजकर 8 मिनट से 8 बजकर 45 मिनट तक
  • लाभ: रात 8 बजकर 45 मिनट से 10 बजकर 23 मिनट तक
  • उद्वेग: रात 10 बजकर 23 मिनट से 12 बजकर 1 मिनट तक
  • शुभ: रात 12 बजकर 1 मिनट से 1 बजकर 39 मिनट तक (7 नवंबर)
  • अमृत: रात 1 बजकर 39 मिनट से 3 बजकर 17 मिनट तक
  • चर: सुबह 3 बजकर 17 मिनट से 4 बजकर 55 मिनट तक
  • रोग: सुबह 4 बजकर 55 मिनट से 6 बजकर 32 मिनट तक

धनतेरस पर सोना-चांदी और बर्तन खरीदने का क्या है महत्व?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस के दिन नई वस्तुओं की खरीदारी करना शुभ माना जाता है। विशेष रूप से सोना, चांदी, पीतल और तांबे के बर्तन खरीदने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई शुभ वस्तुएं घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली लेकर आती हैं। वहीं, भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और आरोग्य का देवता माना जाता है, इसलिए इस दिन उनकी पूजा कर परिवार के अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की जाती है। भगवान कुबेर की आराधना धन-संपत्ति में वृद्धि के लिए तथा मां लक्ष्मी की पूजा घर में सुख-समृद्धि और वैभव बनाए रखने के लिए की जाती है।

दीपावली महापर्व की शुरुआत धनतेरस से

धनतेरस के साथ ही पांच दिवसीय दीपावली उत्सव का शुभारंभ हो जाता है। इसके बाद छोटी दीपावली, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज का पर्व मनाया जाता है। धनतेरस के दिन घरों की साफ-सफाई, सजावट, दीप प्रज्ज्वलन और पूजा-पाठ का विशेष महत्व होता है। लोग अपने घरों और प्रतिष्ठानों को रोशनी से सजाते हैं तथा मां लक्ष्मी के स्वागत की तैयारियां करते हैं। इस तरह धनतेरस केवल खरीदारी का पर्व नहीं, बल्कि धन, स्वास्थ्य, खुशहाली और सकारात्मकता का संदेश देने वाला महत्वपूर्ण त्योहार है।