रायपुर :- दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही लोगों में धनतेरस से लेकर भाई दूज तक मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहारों की तारीख और पूजा के शुभ मुहूर्त को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। साल 2026 में दीपोत्सव के दौरान धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज जैसे पांच प्रमुख पर्व मनाए जाएंगे। इन सभी त्योहारों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार, अलग-अलग पर्वों पर पूजा के लिए प्रदोष काल, संध्याकाल और सुबह के शुभ मुहूर्त का विशेष ध्यान रखा जाता है।
धनतेरस का पर्व भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देवता की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन लोग सोना-चांदी, बर्तन और अन्य धातुओं की वस्तुएं खरीदना शुभ मानते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर प्रदोष काल में पूजा करने का विशेष महत्व है।
नरक चतुर्दशी यानी छोटी दीपावली का पर्व इस साल 8 नवंबर, रविवार को मनाया जाएगा। इसे रूप चतुर्दशी, काली चौदस और यम चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन अभ्यंग स्नान और यम दीपदान की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पर्व का संबंध भगवान श्रीकृष्ण से भी जुड़ा हुआ है।
दीपावली का मुख्य पर्व भी 8 नवंबर को मनाया जाएगा। कार्तिक मास की अमावस्या तिथि पर मनाए जाने वाले इस त्योहार में माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व है। इस वर्ष अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11 बजकर 27 मिनट से शुरू होकर 9 नवंबर को रात 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगी। दीपावली पर प्रदोष काल में लक्ष्मी-गणेश पूजन करना शुभ माना जाता है।
इसके बाद 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के साथ अन्नकूट का आयोजन किया जाता है। गोवर्धन पूजा पर प्रतिपदा तिथि का सुबह के समय होना महत्वपूर्ण माना जाता है। दी गई पंचांग जानकारी के अनुसार, प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर की रात 12 बजकर 31 मिनट से शुरू होकर 10 नवंबर को दोपहर 2 बजे तक रहेगी।
दीपोत्सव का अंतिम प्रमुख पर्व भाई दूज 11 नवंबर को मनाया जाएगा। इसे यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। दी गई जानकारी के अनुसार, द्वितीया तिथि 10 नवंबर को दोपहर 2 बजे से शुरू होकर 11 नवंबर को शाम 3 बजकर 53 मिनट तक रहेगी।
इस तरह साल 2026 में पांच प्रमुख त्योहारों के साथ दीपोत्सव का उत्साह देखने को मिलेगा। हालांकि, पूजा करने से पहले अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त की पुष्टि जरूर कर लें।


