रायपुर :- दीपावली के पावन पर्व से ठीक पहले छत्तीसगढ़ के बुनकरों और सिलाई कार्य से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशा और ग्रामोद्योग मंत्री गजेन्द्र यादव के विशेष निर्देशों के तहत राज्य सरकार ने बुनकर सहकारी समितियों और महिला स्व-सहायता समूहों को उनके श्रम का पारिश्रमिक जारी कर दिया है। इसके तहत कुल 9 करोड़ 41 लाख रुपये की राशि RTGS के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की गई है। समय पर भुगतान मिलने से हजारों परिवारों की दीपावली की खुशियां और बढ़ गई हैं।

समय पर भुगतान से मजबूत हो रहा स्थानीय हुनर

ग्रामोद्योग मंत्री गजेन्द्र यादव ने इस संबंध में प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि बुनकरों और महिला स्व-सहायता समूहों के कठिन परिश्रम का समय पर पारिश्रमिक भुगतान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार स्थानीय हुनर को रोजगार से जोड़कर बुनकरों और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। दीपावली से पहले पारिश्रमिक मिलने से उनके परिवारों में उत्साह और समृद्धि का माहौल बनेगा।

मंत्री ने कहा कि वोकल फॉर लोकल की भावना को आत्मसात करते हुए बुनाई और गणवेश यानी यूनिफॉर्म सिलाई के माध्यम से जमीनी स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। महिलाओं के कौशल विकास और स्वरोजगार का दायरा बढ़ाकर उनकी आय में वृद्धि करना सरकार का प्रमुख उद्देश्य है।

302 बुनकर समितियों को 7.60 करोड़ रुपये का भुगतान

ग्रामोद्योग विभाग के सचिव सह प्रबंध संचालक राजेश सिंह राणा ने जानकारी देते हुए बताया कि वित्तीय वर्ष और त्योहारी सीजन के दौरान पारिश्रमिक का वितरण पूरी पारदर्शिता के साथ सीधे बैंक खातों में किया गया है। प्रदेश के 26 जिलों की 302 बुनकर सहकारी समितियों को अक्टूबर 2026 में 7 करोड़ 60 लाख रुपये का भुगतान किया गया। इसके अलावा 3 नवंबर को 49 बुनकर सहकारी समितियों को 1 करोड़ 50 लाख रुपये तथा 128 महिला स्व-सहायता समूहों को 31 लाख रुपये का अतिरिक्त पारिश्रमिक जारी किया गया।

चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 76.13 करोड़ रुपये का भुगतान

राज्य हाथकरघा संघ की ओर से वित्तीय वर्ष 2026-27 में 3 नवंबर तक कुल 76 करोड़ 13 लाख 54 हजार रुपये सीधे बैंक खातों में अंतरित किए जा चुके हैं। इसमें 345 बुनकर सहकारी समितियों को बुनाई पारिश्रमिक के रूप में 54 करोड़ 87 लाख रुपये और 2005 महिला स्व-सहायता समूहों को सिलाई पारिश्रमिक के रूप में 21 करोड़ 17 लाख रुपये दिए गए हैं। यह राशि प्रदेश में बुनाई और सिलाई से जुड़े हजारों लोगों की आजीविका को मजबूती प्रदान कर रही है।

बुनकरों के परिवारों को आर्थिक सहायता और प्रोत्साहन

बुनकरों के कल्याण के लिए भी राज्य सरकार की ओर से सहायता प्रदान की गई है। आकस्मिक मृत्यु के मामलों में 29 आश्रित परिवारों को कुल 5 लाख 80 हजार रुपये की आर्थिक सहायता अनुदान के रूप में दिए गए हैं। वहीं, हाथकरघा क्षेत्र के 11 पुरस्कृत हितग्राहियों को 3 लाख 74 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है। इस पहल का उद्देश्य बुनकर परिवारों को आर्थिक सुरक्षा देना और पारंपरिक हाथकरघा उद्योग से जुड़े लोगों का उत्साह बढ़ाना है।

सुकमा, बस्तर, कोरबा और जशपुर की पुनर्वासित महिलाओं को मिलेगा रोजगार

महिला सशक्तिकरण की दिशा में राज्य सरकार सुदूर और आकांक्षी जिलों में भी विशेष पहल कर रही है। इसके तहत सुकमा, बस्तर, कोरबा और जशपुर जिलों की 30 पुनर्वासित महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई का विशेष प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है।इस पहल के तहत राज्य हाथकरघा संघ के अनुपयोगी और कटपीस कपड़ों का बेहतर उपयोग करते हुए उनसे आकर्षक खिलौने, थैले, बैग और वाटर बैग जैसे उत्पाद तैयार करवाए जाएंगे। इसके लिए महिलाओं को कार्यादेश भी दिए जा रहे हैं। साथ ही उन्हें घर पर ही निःशुल्क सिलाई मशीन उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि वे अपने घर से ही रोजगार शुरू कर सकें और नियमित आय अर्जित कर सकें।

स्थानीय हुनर को रोजगार और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर

छत्तीसगढ़ सरकार की इन पहलों से एक ओर जहां पारंपरिक बुनकरों को उनके श्रम का समय पर भुगतान मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर महिला स्व-सहायता समूहों को सिलाई के माध्यम से रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। दीपावली से पहले 9 करोड़ 41 लाख रुपये का पारिश्रमिक जारी करना बुनकरों और महिलाओं के लिए बड़ी आर्थिक राहत माना जा रहा है। सरकार का उद्देश्य स्थानीय हुनर को प्रोत्साहन देकर रोजगार बढ़ाना, महिला स्वावलंबन को मजबूत करना और प्रदेश की पारंपरिक कला एवं उद्योगों को नई पहचान दिलाना है।