नई दिल्ली :- दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी गूगल ने अपने कर्मचारियों की संख्या और परिचालन खर्च को नियंत्रित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान और स्विट्जरलैंड में चुनिंदा कर्मचारियों के लिए वॉलंटरी एग्जिट प्रोग्राम यानी बायआउट ऑफर पेश किया है। इस योजना के तहत पात्र कर्मचारी अपनी इच्छा से नौकरी छोड़ सकते हैं और इसके बदले कंपनी से आर्थिक मुआवजा प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि, इस फैसले में फिलहाल भारत में काम करने वाले गूगल कर्मचारियों को शामिल नहीं किया गया है। कंपनी का यह कदम ऐसे समय सामने आया है, जब गूगल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और नई तकनीकों पर अपना निवेश लगातार बढ़ा रही है।

इन 5 देशों में कर्मचारियों को मिला बायआउट ऑफर

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, गूगल के प्रवक्ता ने बताया कि कंपनी ने जून से पांच देशों में चुनिंदा कर्मचारियों के लिए वॉलंटरी एग्जिट प्रोग्राम शुरू किया है। इनमें कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान और स्विट्जरलैंड शामिल हैं। इस ऑफर के तहत पात्र कर्मचारियों को स्वेच्छा से नौकरी छोड़ने के बदले आर्थिक पैकेज दिया जाएगा। कंपनी का उद्देश्य अपने कर्मचारियों और संसाधनों को बदलती कारोबारी जरूरतों के अनुसार व्यवस्थित करना है। खास बात यह है कि इस योजना में फिलहाल भारत के कर्मचारियों को जगह नहीं दी गई है।

AI और क्लाउड कंप्यूटिंग पर गूगल का बढ़ता फोकस

गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड कंप्यूटिंग को अपनी भविष्य की बिजनेस रणनीति में प्राथमिकता दे रही है। कंपनी इन क्षेत्रों में भारी निवेश कर रही है और चाहती है कि उसके संसाधन उन विभागों में लगाए जाएं, जहां भविष्य में कारोबार को अधिक मजबूती मिल सकती है। इसी रणनीति के तहत कंपनी की भर्ती प्राथमिकताओं में भी AI और क्लाउड कंप्यूटिंग से जुड़े पदों को प्रमुखता दी जा रही है। इससे पहले भी गूगल के एग्जिट प्रोग्राम में गूगल क्लाउड और AI रिसर्च यूनिट डीपमाइंड के कर्मचारियों को बाहर रखा गया था।

स्विट्जरलैंड में कर्मचारियों को कितना मिलेगा पैसा?

गूगल के स्विट्जरलैंड स्थित ज्यूरिख इंजीनियरिंग सेंटर में करीब 5,000 कर्मचारी काम करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने यहां जून में कर्मचारियों को वॉलंटरी एग्जिट पैकेज की पेशकश की थी, जिसके लिए आवेदन की समयसीमा जुलाई तक निर्धारित की गई थी। इस पैकेज के तहत कर्मचारियों को कंपनी में काम किए गए प्रत्येक वर्ष के बदले एक महीने की सैलरी देने का प्रावधान था। हालांकि, अधिकतम भुगतान 12 महीने की सैलरी तक सीमित रखा गया था। यानी कंपनी में 12 साल या उससे अधिक समय तक काम करने वाले पात्र कर्मचारियों को भी अधिकतम 12 महीने की सैलरी के बराबर पैकेज मिल सकता था।

AI पर बढ़ते निवेश के बीच टेक कंपनियों में खर्च घटाने की रणनीति

दुनियाभर की बड़ी टेक कंपनियां AI इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर और नई तकनीकों के विकास पर भारी रकम खर्च कर रही हैं। इस बढ़ते निवेश के बीच कंपनियां अपने परिचालन खर्च और कर्मचारियों की संख्या को भी नई कारोबारी प्राथमिकताओं के अनुरूप ढाल रही हैं। गूगल के अलावा माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी टेक कंपनियां भी कर्मचारियों के लिए बायआउट और स्वैच्छिक निकास योजनाएं पेश कर चुकी हैं। इससे साफ है कि टेक इंडस्ट्री में अब AI और नई तकनीकों के हिसाब से कामकाज का ढांचा तेजी से बदल रहा है।

2.04 लाख के पार पहुंचा Alphabet का वर्कफोर्स

दिलचस्प बात यह है कि कर्मचारियों के लिए एग्जिट प्रोग्राम शुरू करने के बावजूद अल्फाबेट का कुल वर्कफोर्स बढ़ा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सितंबर 2026 के अंत तक कंपनी में कर्मचारियों की संख्या करीब 2.04 लाख पहुंच गई थी। पिछले छह महीनों में कंपनी ने लगभग 10,000 नए कर्मचारियों को जोड़ा। इस बढ़ोतरी की एक बड़ी वजह साइबर सिक्योरिटी कंपनी Wiz का अधिग्रहण भी माना जा रहा है।

Wiz के अधिग्रहण से जुड़े करीब 2,000 कर्मचारी गूगल में शामिल

गूगल ने मार्च 2026 में साइबर सिक्योरिटी कंपनी Wiz का अधिग्रहण किया था। इस सौदे के बाद Wiz के करीब 2,000 कर्मचारी गूगल के वर्कफोर्स का हिस्सा बन गए। इस अधिग्रहण से कंपनी की साइबर सिक्योरिटी क्षमताओं को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही कर्मचारियों की कुल संख्या में भी इजाफा हुआ है।

क्या होता है Buyout या Voluntary Exit Program?

बायआउट या वॉलंटरी एग्जिट प्रोग्राम ऐसी व्यवस्था है, जिसमें कंपनी कर्मचारियों को जबरन नौकरी से हटाने के बजाय स्वेच्छा से इस्तीफा देने का विकल्प देती है। इसके बदले कर्मचारियों को उनकी नौकरी की अवधि और कंपनी की निर्धारित शर्तों के अनुसार आर्थिक मुआवजा दिया जाता है। इसमें एकमुश्त भुगतान, सेवरेंस पैकेज और कुछ अन्य सुविधाएं शामिल हो सकती हैं। इसका मुख्य उद्देश्य कंपनी के खर्च को नियंत्रित करना और कर्मचारियों की संख्या को भविष्य की कारोबारी जरूरतों के अनुसार व्यवस्थित करना होता है।