रायपुर :- श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर परम पूज्य इंद्रेश महाराज जी के श्रीमुखारविंद से भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का दिव्य प्रसंग एवं भगवान की असीम कृपा की मंगलमयी कथा सुनने का सौभाग्य प्राप्त होगा। कृषि मंडी देवेंद्रनगर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है।
वहीं, कथा के तीसरे दिन भागवताचार्य इंद्रेश महाराज जी ने वामन द्वादशी के अवसर पर भगवान वामन अवतार की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं को जीवन में आने वाली कठिन परिस्थितियों के बीच भगवान के नाम और भक्ति से जुड़े रहने का संदेश दिया।
इंद्रेश महाराज जी ने कहा कि जीवन में परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, व्यक्ति को भगवत नाम का त्याग नहीं करना चाहिए। उन्होंने भगवत नाम को छतरी के समान बताते हुए कहा कि संकट, संघर्ष, पीड़ा और कष्ट के समय भगवान का नाम मनुष्य को संबल देता है। उन्होंने कहा कि जीवन में टेढ़े दिन आ सकते हैं, लेकिन भक्ति में टेढ़े दिन नहीं आने चाहिए और ठाकुर जी के प्रति प्रेम बना रहना चाहिए।
ईर्ष्या को बताया बड़ा दोष
कथा के दौरान इंद्रेश महाराज जी ने ईर्ष्या को मनुष्य के जीवन का बड़ा दोष बताया। उन्होंने कहा कि आज कई लोग दूसरों की सादगी, खुशी, सुख और भलाई को देखकर परेशान हो जाते हैं। व्यक्ति को दूसरों की परिस्थितियों से तुलना करने के बजाय अपने जीवन में संतोष और भक्ति का भाव रखना चाहिए।
‘प्रभु के लिए विरह हर किसी को नहीं आता’
प्रेम और विरह की व्याख्या करते हुए इंद्रेश महाराज जी ने कहा कि जब किसी व्यक्ति को किसी से प्रेम होता है तो वह उससे मिलने और उसे देखने के लिए कई बहाने तलाशता है। उन्होंने इसी भाव को भगवान के प्रति प्रेम से जोड़ते हुए मीराबाई और वृत्रासुर के प्रसंग का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि सांसारिक सुख के प्रति आसक्ति स्थायी नहीं होती, जबकि भगवान के प्रति प्रेम में सच्ची व्याकुलता और समर्पण होना चाहिए। उनके अनुसार भगवान के प्रति ऐसा प्रेम और विरह हर किसी के जीवन में सहज रूप से नहीं आता।
छल-कपट और झूठ से बचने की सीख
इंद्रेश महाराज जी ने श्रद्धालुओं को छल, कपट और झूठ जैसे अवगुणों से दूर रहने की सीख दी। उन्होंने कहा कि किसी के साथ गलत करने के बाद केवल क्षमा मांग लेना पर्याप्त नहीं है। गलती स्वीकार करने के साथ यह संकल्प भी जरूरी है कि भविष्य में वह गलती दोबारा नहीं होगी और अवगुणों का त्याग किया जाएगा।
उन्होंने बाहरी वेशभूषा देखकर किसी व्यक्ति के स्वभाव का आकलन नहीं करने की बात भी कही और श्रद्धालुओं को जीवन में विवेक एवं सावधानी बनाए रखने का संदेश दिया।
चतुर्थ दिवस पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का दिव्य प्रसंग कथा का विशेष आकर्षण रहेगा। परम पूज्य इंद्रेश महाराज जी के श्रीमुखारविंद से भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की मंगलमयी कथा एवं भगवान की असीम कृपा का वर्णन किया जाएगा, जिसे सुनने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है।


