रायपुर। देवेन्द्रनगर मंडी मैदान में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन रविवार को श्रद्धालुओं की मौजूदगी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम का डिजिटल माध्यम से सामूहिक श्रवण किया गया। कथा स्थल पर एक ही जगह बड़ी संख्या में लोगों द्वारा डिजिटल ब्रॉडकास्ट के जरिए ‘मन की बात’ सुनने का रिकॉर्ड गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। इस उपलब्धि पर गोल्डन बुक की ओर से प्रमाण पत्र इन्द्रेश जी महाराज और राज्यसभा सांसद तरुण चुघ के माध्यम से रायपुर जिला भाजपा इकाई एवं आयोजन समिति को सौंपा गया। इस दौरान सांसद लक्ष्मी वर्मा, मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक राजेश मूणत, सुनील सोनी, पुरंदर मिश्रा और मोतीलाल साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं संत मौजूद रहे।
सात दिनों तक चली श्रीमद्भागवत कथा का रविवार को भावपूर्ण समापन हुआ। अंतिम दिन व्यासपीठ से भागवताचार्य इन्द्रेश जी महाराज ने युवाओं को कर्म, शिक्षा और भक्ति के बीच संतुलन बनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में ऐसा कर्म करना चाहिए, जिससे व्यक्ति को अपनी भक्ति पर भी गर्व महसूस हो। युवाओं से उन्होंने पढ़ाई को प्राथमिकता देने और पूरे मन-लगन के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने की अपील की।
इन्द्रेश महाराज ने कहा कि आज के समय में डॉक्टर, इंजीनियर या आईएएस बनने के लिए मेहनत करना भी भगवान की साधना का एक माध्यम माना जा सकता है। उन्होंने युवाओं से पढ़ाई में 90 से 99 प्रतिशत तक परिणाम हासिल करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ने की बात कही। उनका कहना था कि नामजप और कथा के लिए समय न मिल पाने को बहाना न बनाएं, बल्कि अपने अध्ययन और जिम्मेदारियों को भी भगवान को समर्पित भाव से पूरा करें।
कथा के दौरान उन्होंने एक युवती का उदाहरण देते हुए बताया कि उसने इसी सोच के साथ एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की और डॉक्टर बनने के बाद वृंदावन में अपना क्लीनिक शुरू किया, जहां जरूरतमंद लोगों को नि:शुल्क चिकित्सा सेवाएं दी जा रही हैं। महाराज ने लोगों से किसी की तरक्की, खुशी या सफलता से ईर्ष्या करने के बजाय शुभकामना रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि समझदार और सामर्थ्यवान व्यक्ति किसी के लिए बद्दुआ नहीं करता।
कथा के अंतिम दिन विदाई का माहौल भी भावुक रहा। इन्द्रेश महाराज ने श्रद्धालुओं से कहा कि सात दिनों तक उन्होंने कथा केवल सुनने के लिए नहीं, बल्कि उसके संदेश को जीवन में उतारने के लिए सुनी है। भगवान जगन्नाथ की भक्ति से जुड़ा भजन प्रस्तुत किए जाने के दौरान कई श्रद्धालु भावुक होकर रो पड़े। महाराज ने कहा कि इन भावनाओं को सद्कर्म, सेवा और भक्ति के मार्ग में लगाएं और जीवन में ऐसे कार्य करें, जिनके कारण लोग उन्हें सम्मान के साथ याद करें।
कथा के सफल आयोजन के लिए मुख्य सेवादार गुंजन प्रजापति ने सभी श्रद्धालुओं, करीब चार सौ सेवादारों, पुलिस-प्रशासन, मीडिया और सहयोगियों का आभार जताया। वहीं इन्द्रेश महाराज ने बताया कि छत्तीसगढ़वासियों के स्नेह और आमंत्रण के चलते उन्हें वर्ष 2027, 2028 और 2029 में भी कथा के लिए आमंत्रित किया गया है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भी वे श्रद्धालुओं के बीच कथा श्रवण कराने पहुंचेंगे।


