रायपुर :- खराब, दूषित या बासी खाना खाने के बाद फूड पॉइजनिंग की समस्या हो सकती है। इसके कारण पेट में मरोड़ और ऐंठन के साथ उल्टी, दस्त, जी मिचलाना और कमजोरी जैसी परेशानियां हो सकती हैं। दूषित भोजन में मौजूद बैक्टीरिया, वायरस या उनके विषाक्त पदार्थ पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे शरीर उन्हें बाहर निकालने के लिए उल्टी और दस्त जैसी प्रतिक्रिया करता है।

फूड पॉइजनिंग के दौरान सबसे जरूरी है कि शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी न होने दें। उल्टी और दस्त की वजह से डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पीते रहें और जरूरत के अनुसार ORS घोल लिया जा सकता है। अगर एक साथ ज्यादा पानी पीने से उल्टी होती है तो छोटे-छोटे घूंट लेकर तरल पदार्थ लेते रहें।

पेट को आराम देने के लिए कुछ समय तक तला-भुना, मसालेदार और ज्यादा तेल वाला भोजन करने से बचें। भूख कम होने पर जबरदस्ती खाना खाने के बजाय शरीर को आराम देना बेहतर है। तबीयत में सुधार होने पर हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन धीरे-धीरे शुरू किया जा सकता है। पेट में ऐंठन या मरोड़ होने पर हल्की गर्म सिकाई से भी कुछ लोगों को राहत मिल सकती है।

फूड पॉइजनिंग के दौरान पर्याप्त आराम और नींद लेना भी जरूरी है। कमजोरी के बीच ज्यादा शारीरिक मेहनत या व्यायाम से बचना चाहिए। वहीं पेट दर्द, उल्टी या दस्त के लिए बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं लेने से बचें। खासकर दस्त रोकने वाली दवाएं और एंटीबायोटिक हर स्थिति में उपयुक्त नहीं होते। जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।

अगर पेट दर्द बहुत तेज हो या लगातार बढ़ रहा हो, बार-बार उल्टी हो रही हो, मल में खून आए, तेज बुखार हो या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। पेशाब कम होना, मुंह सूखना, चक्कर आना या बेहोशी जैसे लक्षण डिहाइड्रेशन के संकेत हो सकते हैं। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में विशेष सावधानी जरूरी है।