केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने दिव्यांग वाहन चालकों के लिए एक्जेम्टेड FASTag (Exempted FASTag) की वैधता और रिन्यूअल प्रक्रिया में बदलाव किया है। नए नियमों के तहत अब FASTag की वैधता दिव्यांगता के प्रतिशत के आधार पर तय की जाएगी। इससे पात्र वाहन मालिकों को बार-बार टैग रिन्यू कराने और कागजी औपचारिकताओं से गुजरने की जरूरत कम होगी। इस पहल का उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर दिव्यांग यात्रियों के सफर को अधिक सुविधाजनक बनाना है।
नए प्रावधानों के अनुसार, 70 प्रतिशत से 100 प्रतिशत तक दिव्यांगता वाले पात्र व्यक्तियों के वाहनों के Exempted FASTag की वैधता 5 वर्ष होगी। वहीं, 40 प्रतिशत से 70 प्रतिशत से कम दिव्यांगता वाले पात्र व्यक्तियों के लिए इसकी वैधता 3 वर्ष निर्धारित की गई है। इस व्यवस्था से दिव्यांगता के प्रमाण पत्र में दर्ज प्रतिशत के आधार पर टैग की वैधता तय करने में सुविधा होगी।
एक्जेम्टेड FASTag के लिए आवेदकों को मान्य दिव्यांगता प्रमाण पत्र, यूनिक डिसेबिलिटी आईडी (UDID) कार्ड या सरकार द्वारा स्वीकृत अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। निर्धारित वैधता अवधि पूरी होने के बाद पात्र व्यक्ति नियमानुसार टैग का रिन्यूअल करा सकेंगे। इसके लिए नेशनल हाईवे फी रूल्स, 2008 के तहत लागू अन्य शर्तों का पालन करना भी जरूरी होगा।
एक्जेम्टेड FASTag एक विशेष रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) आधारित टैग है, जिसे पात्र वाहनों की विंडशील्ड पर लगाया जाता है। इसका इस्तेमाल राष्ट्रीय राजमार्गों के टोल प्लाजा पर वाहन की पहचान और टोल छूट से संबंधित प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के लिए किया जाता है। हालांकि, यह सुविधा केवल निर्धारित नियमों के तहत पात्र व्यक्तियों और वाहनों को ही मिलती है।
इस बदलाव से दिव्यांग वाहन चालकों को बार-बार रिन्यूअल कराने की परेशानी से राहत मिलने और समय की बचत होने की उम्मीद है। साथ ही, टोल प्लाजा पर पहचान संबंधी प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाने में भी मदद मिल सकती है। आवेदन करने से पहले वाहन चालकों को संबंधित आधिकारिक दिशा-निर्देशों और पात्रता शर्तों की पुष्टि कर लेनी चाहिए।


