रायपुर :- छत्तीसगढ़। प्रदेश में टीबी उन्मूलन की दिशा में जनभागीदारी को मजबूत करने के लिए गुरुवार को खड़गवां में राज्य स्तरीय ‘जोश टीम’ का शुभारंभ किया गया। इसके साथ ही प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में जिला स्तरीय कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। राष्ट्रीय स्तर पर शुरू की जा रही इस पहल के तहत माय भारत के युवा स्वयंसेवकों और एनसीसी कैडेटों को टीबी उन्मूलन अभियान से जोड़ा जा रहा है। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ में पहली बार खड़गवां, सोनहत, बतौली और घरघोड़ा सहित चार विकासखंडों को टीबी मुक्त घोषित किया गया। इन विकासखंडों ने छत्तीसगढ़ के साथ देश में भी पहली बार टीबी मुक्त विकासखंड बनने का गौरव हासिल किया।

कार्यक्रम में मौजूद स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि टीबी उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह समाज के हर वर्ग की सामूहिक जिम्मेदारी है। युवाओं की ऊर्जा और जनभागीदारी को इस अभियान से जोड़कर टीबी उन्मूलन के प्रयासों को नई गति दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि समय पर जांच, नियमित उपचार और इलाज पूरा करने के साथ-साथ टीबी के प्रति जागरूकता फैलाना और सामाजिक भेदभाव खत्म करना भी बेहद जरूरी है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि ‘जोश टीम’ के माध्यम से माय भारत और एनसीसी से जुड़े युवा अपने क्षेत्रों में लोगों को टीबी के लक्षण, जांच, उपचार और बचाव के बारे में जागरूक करेंगे। युवाओं की सक्रिय भागीदारी से टीबी उन्मूलन का संदेश गांव-गांव और जन-जन तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। कार्यक्रम के दौरान वर्ष 2025 के लिए राज्य की 4,676 टीबी मुक्त पंचायतों को जिला स्तर पर सम्मानित भी किया गया।

स्वास्थ्य सेवाओं के संचालक ने चार विकासखंडों को टीबी मुक्त घोषित किए जाने को राज्य के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह सफलता स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, स्वास्थ्यकर्मियों, मितानिनों, निक्षय मित्रों, स्वयंसेवी संगठनों और स्थानीय समुदाय के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। अब इन विकासखंडों में मिली उपलब्धि को बनाए रखने के साथ ही अन्य विकासखंडों को भी टीबी मुक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास करने की जरूरत है। इसके लिए संभावित मरीजों की समय पर पहचान, जांच, गुणवत्तापूर्ण उपचार और इलाज पूरा करवाना प्राथमिकता होनी चाहिए।

कार्यक्रम में माय भारत और एनसीसी के जिला अधिकारियों, युवा स्वयंसेवकों, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों ने टीबी मुक्त छत्तीसगढ़ के संकल्प को मजबूत करने का आह्वान किया। युवाओं को समुदाय के बीच टीबी के लक्षणों की पहचान, समय पर जांच और नियमित उपचार के प्रति जागरूकता फैलाने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। ‘जोश टीम’ के माध्यम से जनभागीदारी बढ़ाकर प्रदेश को टीबी मुक्त बनाने के अभियान को निरंतर गति देने पर जोर दिया गया।