रायपुर :- महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ बढ़ते अपराधों, उत्पीड़न और असुरक्षा के मुद्दे को लेकर राजधानी रायपुर में महिलाओं और युवतियों ने शांतिपूर्ण मार्च निकालकर अपनी आवाज बुलंद की। महिला थाना चौक से शुरू हुआ यह मार्च नारी सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की मांग को लेकर आगे बढ़ा। प्रदर्शन में महिलाओं के साथ युवाओं ने भी हिस्सा लिया और महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई।
मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने “नारी सुरक्षा हमारा अधिकार है, कोई एहसान नहीं” और “एक कचौरी, दो समोसे, इन मर्दों का क्या भरोसा!” जैसे नारों के साथ विरोध दर्ज कराया। छात्राओं के इस नारे ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं, मोतीबाग चौक के पास पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया, जिसके बाद मौके पर जोरदार नारेबाजी हुई। प्रदर्शनकारियों ने महिला सुरक्षा के मुद्दे पर शासन-प्रशासन की जवाबदेही तय करने की मांग की।
प्रदर्शन में शामिल महिलाओं का कहना था कि महिला सुरक्षा केवल कागजों और घोषणाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। स्कूल-कॉलेजों, सड़कों, सार्वजनिक परिवहन और कार्यस्थलों पर सुरक्षित माहौल सुनिश्चित किया जाना जरूरी है, ताकि महिलाएं और बच्चियां बिना किसी डर के घर से बाहर निकल सकें। उन्होंने महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
इस दौरान मुफ्त सैनिटरी पैड की उपलब्धता, छात्राओं की सुरक्षा, महिला पुलिस गश्त बढ़ाने, कार्यस्थलों पर महिलाओं के अधिकारों की रक्षा, साइबर अपराधों पर सख्त कार्रवाई और पीड़ितों को त्वरित न्याय जैसे मुद्दे भी उठाए गए। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर शासन के समक्ष 15 सूत्रीय मांग-पत्र सौंपा और इन मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।
प्रदर्शन के दौरान प्रियंका उपाध्याय ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा कोई एहसान नहीं, बल्कि उनका अधिकार है। वहीं, लिली श्रीवास ने कहा कि महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरे समाज की है। पुनेश्वर लहरे ने भी महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई में युवाओं की भागीदारी को जरूरी बताते हुए महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने शासन-प्रशासन से महिला सुरक्षा के मुद्दे पर ठोस कदम उठाने और 15 सूत्रीय मांग-पत्र पर गंभीरता से कार्रवाई करने की अपील की।


