शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर देशभर के देवी मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। जम्मू-कश्मीर के कटरा स्थित मां वैष्णो देवी धाम में भी श्रद्धालु माता रानी के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। त्रिकुटा पर्वत पर स्थित यह पवित्र तीर्थ लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि माता वैष्णो देवी ने त्रिकुटा पर्वत को ही अपनी तपस्या और निवास के लिए क्यों चुना? इसके पीछे एक प्रचलित पौराणिक कथा जुड़ी हुई है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता वैष्णो देवी का जन्म दक्षिण भारत में रत्नाकर सागर के घर हुआ था। बचपन से ही उनका झुकाव आध्यात्मिक साधना और तपस्या की ओर था। मान्यता है कि उन्होंने भगवान श्रीराम को भगवान विष्णु के अवतार के रूप में पहचाना और उनसे एकाकार होने की इच्छा व्यक्त की। भगवान श्रीराम ने उन्हें समझाया कि उचित समय आने पर उनकी यह इच्छा पूरी होगी। इसी कथा के अनुसार, श्रीराम ने वैष्णवी को त्रिकुटा पर्वत पर जाकर तपस्या करने का निर्देश दिया था।
कथा के मुताबिक, भगवान श्रीराम के आदेश के बाद माता वैष्णवी त्रिकुटा पर्वत पर ध्यान और साधना में लीन हो गईं। इसी दौरान भैरों नाथ की नजर उन पर पड़ी। मान्यता है कि भैरों नाथ माता के पीछे पड़ गया और उन्हें परेशान करने लगा। उससे बचने के लिए माता वैष्णो देवी पर्वतीय मार्ग से आगे बढ़ीं और अर्धकुंवारी की गुफा में कुछ समय बिताने के बाद पवित्र गुफा तक पहुंचीं। भैरों नाथ के पीछा करते हुए वहां पहुंचने पर माता ने उसका वध कर दिया।
पौराणिक कथा के अनुसार, मृत्यु के अंतिम क्षणों में भैरों नाथ को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने माता से क्षमा मांगी। माता वैष्णो देवी ने उसे क्षमा प्रदान की और उसके उद्धार का आशीर्वाद दिया। इसके बाद माता ने पवित्र गुफा में ध्यानमग्न होकर दिव्य स्वरूप धारण किया। मान्यता है कि इसी गुफा में माता के पवित्र पिंडियों के दर्शन होते हैं, जिनके लिए हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु कटरा पहुंचते हैं।
त्रिकुटा पर्वत पर माता वैष्णो देवी के विराजमान होने की कथा भक्तों के लिए श्रद्धा, तपस्या और धर्म की विजय का प्रतीक है। नवरात्र के दौरान श्रद्धालु कठिन पहाड़ी यात्रा पूरी कर ‘जय माता दी’ के जयकारों के साथ माता के दर्शन करते हैं। हालांकि, माता के त्रिकुटा पर्वत पर निवास से जुड़ी ये बातें धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं पर आधारित हैं। भक्तों के लिए यह धाम आज भी आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक शांति का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।


