शारदीय नवरात्र के दौरान बड़ी संख्या में लोग मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के साथ व्रत रखते हैं। इस दौरान खानपान में भी बदलाव किया जाता है और गेहूं की रोटी की जगह कुट्टू, राजगिरा, सिंघाड़े के आटे और साबूदाने से बनी चीजें खाई जाती हैं। लेकिन सवाल यह है कि इन विकल्पों में से सेहत के लिए सबसे फायदेमंद कौन-सा है? दरअसल, हर खाद्य पदार्थ के पोषक तत्व अलग-अलग होते हैं। सही चुनाव करने से व्रत के दौरान शरीर को ऊर्जा देने और पोषण का संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

कुट्टू और राजगिरा का आटा पोषण से भरपूर

व्रत के दौरान कुट्टू और राजगिरा का आटा अच्छे विकल्प हो सकते हैं। कुट्टू में प्रोटीन, फाइबर और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली और पेट भरा रखने में मदद कर सकते हैं। वहीं, राजगिरा यानी रामदाना में प्रोटीन, आयरन और अन्य खनिज तत्व मौजूद होते हैं। इनसे रोटी और चीला बनाकर खाया जा सकता है। हालांकि, इन्हें बनाने में ज्यादा तेल या घी का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।

सिंघाड़े का आटा और साबूदाना देते हैं ऊर्जा

सिंघाड़े के आटे में मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है, जो शरीर को ऊर्जा देने में मदद करता है। इससे पूरी, हलवा और दूसरी व्रत वाली चीजें बनाई जाती हैं। दूसरी ओर, साबूदाना स्टार्च से भरपूर होता है, लेकिन इसमें प्रोटीन और फाइबर अपेक्षाकृत कम होते हैं। इसलिए साबूदाने की खिचड़ी बनाते समय मूंगफली जैसी सामग्री शामिल करना और भोजन में दही जैसे उपयुक्त खाद्य पदार्थों को जगह देना बेहतर हो सकता है। इससे खाने में पोषक तत्वों का संतुलन बढ़ाया जा सकता है।

व्रत में कौन-सा आटा चुनना रहेगा बेहतर?

पोषण के लिहाज से कुट्टू और राजगिरा अच्छे विकल्प हो सकते हैं, क्योंकि इनमें कार्बोहाइड्रेट के साथ प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व भी मिलते हैं। सिंघाड़े का आटा और साबूदाना भी ऊर्जा प्रदान करते हैं, लेकिन किसी एक विकल्प को सभी लोगों के लिए सबसे बेहतर नहीं कहा जा सकता। यह व्यक्ति की उम्र, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। व्रत में भोजन की मात्रा, बनाने का तरीका और दिनभर के खानपान में पोषक तत्वों का संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है।

डायबिटीज के मरीज बरतें सावधानी

अगर आपको डायबिटीज है, तो व्रत के दौरान कुट्टू, राजगिरा, सिंघाड़े और साबूदाने का सेवन सोच-समझकर करें, क्योंकि इनसे भी शरीर में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बढ़ सकती है। भोजन की मात्रा नियंत्रित रखें और लंबे समय तक भूखे रहने से बचें। दवाओं या खानपान में बदलाव करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। कुल मिलाकर, व्रत में कम तेल वाला भोजन, पर्याप्त पानी और प्रोटीन व फाइबर के उपयुक्त स्रोत शामिल करना सेहत के लिए मददगार हो सकता है।