जापान में एक अनोखी पारंपरिक प्रतियोगिता ने लोगों का ध्यान खींचा है। नाहा में आयोजित ग्रेट टग-ऑफ-वॉर उत्सव में हजारों लोग 160 मीटर लंबी और करीब 30 टन वजनी विशाल रस्सी खींचने के लिए जुटे। इस अनूठे मुकाबले में पूर्व और पश्चिम की टीमें आमने-सामने आईं। करीब 10 मिनट तक चले जोरदार संघर्ष के बाद मुकाबला ड्रॉ रहा। इस आयोजन में ताकत और टीमवर्क के साथ जापान की सदियों पुरानी सांस्कृतिक परंपरा की झलक भी देखने को मिली।
15वीं सदी से जुड़ी है परंपरा
जापान में रस्साकशी का यह आयोजन लंबे समय से लोक उत्सव का हिस्सा रहा है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, लोग अच्छी फसल, बेहतर स्वास्थ्य और संतान सुख की कामना के साथ इसमें हिस्सा लेते रहे हैं। प्रतियोगिता में पूर्व और पश्चिम की टीमें रस्सी को अपनी ओर खींचने की कोशिश करती हैं। निर्धारित नियमों के अनुसार, रस्सी को पांच मीटर तक खींचने या 30 मिनट के भीतर दूसरी टीम से अधिक दूरी हासिल करने पर जीत तय होती है।
रस्सी के टुकड़े घर ले जाने की भी परंपरा
इस आयोजन की एक खास बात यह भी है कि प्रतियोगिता के बाद लोग रस्सी के छोटे-छोटे टुकड़े काटकर अपने घर ले जाते हैं। इसे शुभ माना जाता है और यह स्थानीय परंपरा का अहम हिस्सा है। विशाल रस्सी को खींचने के लिए बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी इस उत्सव को खास बनाती है। आयोजन के दौरान सामूहिक प्रयास, उत्साह और सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम देखने को मिलता है।
सांस्कृतिक विरासत के रूप में मिली पहचान
जापान में रस्साकशी के कई पारंपरिक आयोजनों को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व हासिल है। सेंडाई ओत्सुनाहिकी नामक आयोजन की शुरुआत सत्सुमा क्षेत्र, जो अब कागोशिमा प्रान्त का हिस्सा है, के योद्धा शिमाजु योशिहिरो से जुड़ी मानी जाती है। मान्यता है कि उन्होंने सेकिगाहारा की लड़ाई से पहले सैनिकों का मनोबल बढ़ाने के लिए इसकी शुरुआत की थी। इस परंपरा को जापान में महत्वपूर्ण अमूर्त लोक सांस्कृतिक धरोहर का दर्जा भी मिला है। सदियों बाद भी ऐसे आयोजन लोगों को अपनी संस्कृति और इतिहास से जोड़े हुए हैं।


