शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना के साथ कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। नौ दिनों तक माता के नौ स्वरूपों की पूजा करने के बाद अष्टमी या नवमी तिथि पर छोटी कन्याओं को भोजन कराकर व्रत का पारण किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कन्याओं को मां दुर्गा के नौ स्वरूपों का प्रतीक माना जाता है। इस दिन भक्त कन्याओं के पैर धोकर, तिलक लगाकर और उन्हें श्रद्धापूर्वक भोजन कराकर आशीर्वाद लेते हैं।

कन्या पूजन में कितनी कन्याओं को बुलाना शुभ?

परंपरा के अनुसार, कन्या पूजन के लिए नौ कन्याओं को आमंत्रित करना शुभ माना जाता है। इन्हें मां दुर्गा के नौ स्वरूपों का प्रतीक मानकर पूजा जाता है। इसके साथ एक बालक को बटुक भैरव के स्वरूप में पूजने की भी मान्यता है। कन्याओं को आसन पर बैठाकर उनका पूजन किया जाता है और हलवा, चना तथा पूरी जैसे पारंपरिक व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। इसके बाद उन्हें सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा और उपहार देकर विदा किया जाता है।

9 कन्याएं नहीं मिलें तो कितनी कन्याओं का करें पूजन?

कई बार आसपास नौ कन्याएं उपलब्ध नहीं हो पाती हैं। ऐसी स्थिति में धार्मिक परंपराओं के अनुसार, श्रद्धा और सामर्थ्य के मुताबिक कम कन्याओं का पूजन भी किया जा सकता है। मान्यता के अनुसार, 7, 5, 3 या एक कन्या का पूजन भी किया जाता है। पूजा में कन्याओं की संख्या से अधिक श्रद्धा, सम्मान और भक्ति को महत्व दिया जाता है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में कन्या पूजन की परंपराओं में अंतर हो सकता है।

एक, तीन, पांच, सात और नौ कन्याओं के पूजन का क्या है महत्व?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नौ कन्याएं मां दुर्गा के नौ स्वरूपों का प्रतीक हैं। सात कन्याओं का पूजन देवी की विभिन्न शक्तियों की आराधना से जोड़ा जाता है। पांच कन्याओं को पांच दिव्य शक्तियों का प्रतीक माना जाता है, जबकि तीन कन्याओं को मां सरस्वती, मां लक्ष्मी और मां काली यानी त्रिदेवी के स्वरूप में पूजा जाता है। वहीं, एक कन्या को देवी शक्ति का प्रतीक मानकर पूजने की भी परंपरा है। इन मान्यताओं का महत्व अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में भिन्न हो सकता है।

कन्या पूजन के दौरान इन बातों का रखें ध्यान

कन्या पूजन के समय बच्चियों को सम्मानपूर्वक आमंत्रित करें, उनके लिए स्वच्छ आसन और भोजन की व्यवस्था करें तथा उन्हें अपनी सामर्थ्य के अनुसार उपहार दें। पूजा के दौरान किसी भी बच्ची के साथ भेदभाव न करें और उनकी सुविधा व सहमति का ध्यान रखें। नवरात्रि में कन्या पूजन का मुख्य भाव देवी शक्ति के प्रति श्रद्धा, बालिकाओं का सम्मान और सेवा है। इसलिए यदि नौ कन्याएं उपलब्ध न हों, तो चिंता करने के बजाय श्रद्धापूर्वक उपलब्ध कन्याओं का पूजन कर सकते हैं।