रायपुर :- छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने लगातार बढ़ती महंगाई को लेकर राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने चावल, दाल, राशन सामग्री, पेट्रोल-डीजल, बिजली बिल और यात्री बस किराए में बढ़ोतरी पर सवाल उठाते हुए कहा कि आम जनता महंगाई की मार झेल रही है। सरकार महतारी वंदन योजना के नाम पर महिलाओं को पैसे देकर दूसरी ओर विभिन्न माध्यमों से जनता की जेब से वसूली कर रही है।

बस किराए और बिजली बिल में बढ़ोतरी पर जताई नाराजगी

दीपक बैज ने आरोप लगाया कि एक साल में दो बार यात्री बस किराए में बढ़ोतरी की गई है, जिससे किराया 75 प्रतिशत से अधिक बढ़ गया है। वहीं, बिजली बिल को लेकर उन्होंने कहा कि सालभर में दो बार दरें बढ़ाई गई हैं और इस बार उपभोक्ताओं के बिल में 600 से 1000 रुपये तक अतिरिक्त प्रभार जुड़कर आया है। उन्होंने सरकार से बढ़े हुए बिजली बिल को तत्काल कम करने की मांग की। बैज ने कहा कि प्रदेश में कोयला सहित तमाम संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद पर्याप्त बिजली उत्पादन नहीं हो पा रहा है और दूसरे राज्यों से महंगी दरों पर बिजली खरीदनी पड़ रही है।

कौशल्या माता धाम में भगवान राम की नई मूर्ति नहीं लगने पर उठाए सवाल

कौशल्या माता धाम में भगवान राम की नई मूर्ति स्थापित नहीं किए जाने को लेकर भी दीपक बैज ने सरकार पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में मूर्ति बदलने का निर्णय लिया गया था और नई मूर्ति भी तैयार करवा ली गई थी। इसके बावजूद अब तक मूर्ति स्थापित क्यों नहीं की गई, सरकार को इसका जवाब देना चाहिए। बैज ने भाजपा पर भगवान राम और गौ माता के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए मंदिरों के चढ़ावे को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए।

आदिवासी विभाग का नाम बदलने के फैसले का किया विरोध

आदिवासी विभाग का नाम बदलकर जनजाति विभाग किए जाने के फैसले पर भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार लगातार आदिवासी हितों की अनदेखी कर रही है। बैज ने सवाल उठाया कि भाजपा को आदिवासी शब्द से इतनी आपत्ति क्यों है? उन्होंने मुख्यमंत्री और संबंधित मंत्री की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए सरकार से इस निर्णय को तत्काल वापस लेने की मांग की।

जनता को राहत देने की मांग

दीपक बैज ने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई से आम लोगों के घरेलू बजट पर असर पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से बिजली बिल और यात्री किराए में हुई बढ़ोतरी पर पुनर्विचार करने तथा आम जनता को राहत देने की मांग की। साथ ही आरोप लगाया कि सरकार जनहित के मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय राजनीतिक फैस

लों में उलझी हुई है।