रायपुर :- राजधानी रायपुर में डामर की कीमतों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी का असर सड़क निर्माण कार्यों पर पड़ने लगा है। 15वें वित्त आयोग की राशि से शहर में बनाई जा रही छह सड़कों का काम प्रभावित हुआ है। स्थिति को देखते हुए रायपुर नगर पालिक निगम ने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग को पत्र लिखकर डामर की बढ़ी हुई कीमतों के अनुसार निर्माण दरों में संशोधन करने की मांग की है। निगम ने पत्र में लोक निर्माण विभाग (PWD) के उस आदेश का हवाला दिया है, जिसके तहत डामर की कीमतों में असाधारण वृद्धि के कारण ठेकेदारों को राहत देने का निर्णय लिया गया था।
निगम के मुताबिक, वैश्विक परिस्थितियों और खाड़ी युद्ध जैसी स्थिति के कारण बिटुमिन यानी डामर के दाम में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है। इसके चलते सड़क निर्माण में लगे ठेकेदारों के सामने पुराने अनुबंधित दरों पर काम पूरा करने में परेशानी आ रही है। लोक निर्माण विभाग ने अपने कार्यों के लिए दरों में संशोधन कर राहत दी है, लेकिन नगरीय निकाय विभाग में अब तक ऐसी व्यवस्था नहीं होने के कारण रायपुर में सड़क निर्माण कार्य प्रभावित होने की बात सामने आई है।
निगम ने अपने पत्र में शहर की छह निर्माणाधीन सड़कों का उल्लेख करते हुए बताया है कि इनमें से दो सड़कों का काम अब तक शुरू नहीं हो पाया है। वहीं, अन्य सड़कों में एक का 60 प्रतिशत, दूसरी का 50 प्रतिशत, तीसरी का 40 प्रतिशत और चौथी सड़क का महज 10 प्रतिशत काम पूरा हुआ है। इन मार्गों पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोगों का आवागमन होता है। ऐसे में निर्माण कार्यों में देरी से आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
डामर की बढ़ी कीमतों के बीच निगम ने उपलब्ध राशि से ठेकेदारों को अंतर की राशि का भुगतान करने की अनुमति मांगी है। पत्र के अनुसार, कार्य पूर्ण होने के बाद बचने वाली राशि और जीएसटी की बचत को मिलाकर कुल 458.76 लाख रुपये उपलब्ध हैं। निगम ने प्रस्ताव दिया है कि निर्धारित गणना सूत्र के आधार पर डामर की पुरानी और नई दरों के अंतर का भुगतान इसी उपलब्ध राशि से किया जा सके, ताकि सड़क निर्माण और नवीनीकरण के कार्य तकनीकी मानकों के अनुरूप पूरे किए जा सकें।
अब इस मामले में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के निर्णय पर नजर रहेगी। यदि दरों में संशोधन और अतिरिक्त भुगतान की अनुमति मिलती है, तो रायपुर की प्रभावित सड़कों का निर्माण आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है। हालांकि, फिलहाल निगम की ओर से अनुमति मांगी गई है और विभाग की मंजूरी के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।


