रायगढ़ :- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आदिवासी समाज का इतिहास शौर्य, स्वाभिमान, संघर्ष और प्रकृति के प्रति अगाध श्रद्धा का प्रतीक है। जल, जंगल और जमीन के संरक्षण की सीख आदिवासी समाज ने अपनी परंपराओं के माध्यम से सदियों से दी है, जो आज पूरी दुनिया के लिए प्रेरणादायी है। मुख्यमंत्री रायगढ़ जिले के तमनार विकासखंड के ग्राम सारसमाल में आयोजित उरांव समाज के कर्मा पूजा महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने भगवान करम देव और भगवान शिव-माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की।

कर्मा महोत्सव के दौरान जनजातीय संस्कृति की अनूठी झलक देखने को मिली। कर्मा दलों के आग्रह पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय स्वयं मांदर लेकर समाजजनों के बीच पहुंचे और महिला-पुरुषों के साथ पारंपरिक कर्मा नृत्य किया। मुख्यमंत्री की सहभागिता से कार्यक्रम में मौजूद लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। उन्होंने कहा कि कर्मा पर्व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, सामूहिकता और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का उत्सव है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी भाषा, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मुख्यमंत्री ने जनजातीय महापुरुषों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान बिरसा मुंडा, शहीद वीर नारायण सिंह और शहीद गुंडाधुर जैसे महानायकों ने मातृभूमि, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए अदम्य साहस का परिचय दिया। उनकी वीरता और बलिदान समाज की अमूल्य विरासत हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जनजातीय समाज के विकास के लिए अलग जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन किया था। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय समुदायों के सम्मान, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

सीएम साय ने युवाओं से शिक्षा को प्राथमिकता देने और बड़े लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के अवसर उपलब्ध करा रही है। प्रयास आवासीय विद्यालयों और नालंदा परिसर जैसी सुविधाओं के माध्यम से युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में जनजातीय विद्यार्थियों के छात्रावास की क्षमता बढ़ाकर 200 सीट की गई है। मुख्यमंत्री ने युवाओं से शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और स्वरोजगार की योजनाओं का लाभ उठाकर समाज की प्रगति में योगदान देने की अपील की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार जनजातीय बहुल क्षेत्रों में विकास की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए काम कर रही हैं। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और पीएम-जनमन जैसी योजनाओं के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों में आवास, सड़क, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य जनजातीय समाज की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए उसे शिक्षा, रोजगार और विकास के नए अवसरों से जोड़ना है। कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह और उरांव समाज विकास समिति के पदाधिकारियों ने भी समाज की एकजुटता, सांस्कृतिक विरासत और शिक्षा के महत्व पर विचार रखे।

कार्यक्रम में पारंपरिक वेशभूषा में सजे महिला-पुरुषों ने मांदर, ढोल और मृदंग की थाप पर कर्मा नृत्य प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी संस्कृति केवल परंपराओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व और सामाजिक एकता का संदेश भी देती है। उन्होंने समाजजनों से अपनी समृद्ध विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने और आधुनिक शिक्षा के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री के अनुसार, संस्कृति और शिक्षा का समन्वय ही जनजातीय समाज के उज्ज्वल भविष्य का मजबूत आधार बन सकता है।