नई दिल्ली, 4 नवंबर 2026: भारत के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर में स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने के लिए तीन नए AI मॉडल पेश किए गए हैं। केंद्र सरकार के IndiaAI Mission के तहत EKA-1, Dhīr 2B और Dhīr 5B को सार्वजनिक रूप से जारी किया गया है। इन मॉडलों को भारतीय भाषाओं, स्थानीय जरूरतों और सुरक्षित डिजिटल इस्तेमाल को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।

इनमें EKA-1 को Soket Labs Technology and Research ने तैयार किया है, जबकि Dhīr 2B और Dhīr 5B को ZenteiQ AiTech Innovations ने विकसित किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अनुसार, इन मॉडलों का इस्तेमाल गणित, कोडिंग, तर्क क्षमता, दस्तावेजों से जानकारी निकालने और अलग-अलग संस्थानों की डिजिटल सेवाओं में किया जा सकता है।

EKA-1 AI मॉडल की क्या हैं खासियतें?

तीनों मॉडलों में EKA-1 अपनी बड़ी तकनीकी क्षमता और भाषा समर्थन के कारण खास है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इसमें 26.3 बिलियन पैरामीटर हैं और इसे लगभग 7.5 ट्रिलियन टोकन पर प्रशिक्षित किया गया है।

EKA-1 की प्रमुख विशेषताएं:

  • भारत की सभी 22 अनुसूचित भाषाओं और अंग्रेजी का समर्थन।
  • गणित, कोडिंग और तर्क आधारित कार्यों के लिए डिजाइन।
  • AI एजेंट आधारित इस्तेमाल की क्षमता।
  • बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों की जरूरतों पर फोकस।

इसका उद्देश्य केवल सामान्य बातचीत तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के डिजिटल और वित्तीय ढांचे से जुड़े विशेष कार्यों में AI की उपयोगिता बढ़ाना भी है।

Dhīr 2B और Dhīr 5B क्या कर सकते हैं?

ZenteiQ द्वारा विकसित Dhīr 2B और Dhīr 5B ओपन-सोर्स AI मॉडल हैं। ये अंग्रेजी के साथ 10 भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करते हैं।

इनकी एक अहम विशेषता इन्हें अपने संस्थान के सर्वर या स्थानीय कंप्यूटिंग सिस्टम पर चलाने की क्षमता है। कंपनी के अनुसार, इनके हल्के आर्किटेक्चर के कारण कुछ उपयोगों में इन्हें मोबाइल डिवाइस पर भी चलाया जा सकता है।

इन मॉडलों को खास तौर पर ऐसे वातावरण के लिए उपयोगी माना जा रहा है जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी सीमित हो या संवेदनशील डेटा को बाहरी क्लाउड सर्वर पर भेजना उचित न हो।

संभावित इस्तेमाल में शामिल हैं:

  • सरकारी और औद्योगिक दस्तावेजों से जानकारी निकालना।
  • संस्थानों के लिए AI आधारित सहायता प्रणाली।
  • शिक्षा और शोध से जुड़े कार्य।
  • संवेदनशील नेटवर्क में स्थानीय AI सेवाएं।
  • नागरिक सेवाओं और आंतरिक प्रक्रियाओं का ऑटोमेशन।

हालांकि, किसी विशेष मोबाइल फोन या कंप्यूटर पर इनकी वास्तविक परफॉर्मेंस उपलब्ध हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर कॉन्फिगरेशन पर निर्भर करेगी।

भारत के लिए स्वदेशी AI मॉडल क्यों महत्वपूर्ण हैं?

आज AI सेवाओं का बड़ा हिस्सा विदेशी कंपनियों के विकसित किए गए मॉडल और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर है। इससे डेटा सुरक्षा, लागत, स्थानीय भाषाओं की समझ और तकनीकी निर्भरता जैसे सवाल उठते हैं।

स्वदेशी मॉडल विकसित होने से भारतीय कंपनियों, सरकारी संस्थानों और शोधकर्ताओं को स्थानीय जरूरतों के अनुसार AI समाधान तैयार करने के नए अवसर मिल सकते हैं।

उदाहरण के लिए, किसी सरकारी विभाग को स्थानीय भाषा में दस्तावेजों का विश्लेषण करना हो या बैंक को अपने सुरक्षित नेटवर्क में AI आधारित सहायता प्रणाली तैयार करनी हो, तो ऐसे मॉडल उपयोगी साबित हो सकते हैं।

फिर भी, स्वदेशी मॉडल लॉन्च होना अपने आप में विदेशी AI सेवाओं का विकल्प बन जाने के बराबर नहीं है। वास्तविक सफलता उनकी सटीकता, सुरक्षा, लागत, उपलब्धता और स्वतंत्र परीक्षणों के परिणामों पर निर्भर करेगी।

IndiaAI Mission की भूमिका

IndiaAI Mission को देश में AI इकोसिस्टम मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। इसके तहत कंप्यूटिंग क्षमता, स्टार्टअप फंडिंग, डेटासेट, कौशल विकास, सुरक्षित AI और नवाचार जैसे क्षेत्रों पर काम किया जा रहा है।

EKA-1 और Dhīr मॉडल इसी मिशन के IndiaAI Innovation Centre के तहत विकसित किए गए हैं। इस पहल का उद्देश्य भारत में AI अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना तथा देश की भाषाओं और जरूरतों के अनुरूप तकनीक तैयार करना है।

निष्कर्ष

EKA-1, Dhīr 2B और Dhīr 5B का लॉन्च भारत के स्वदेशी AI विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। जहां EKA-1 का फोकस 22 भारतीय भाषाओं सहित व्यापक भाषा और तर्क क्षमता पर है, वहीं Dhīr मॉडल सुरक्षित और स्थानीय स्तर पर AI इस्तेमाल की संभावनाएं पेश करते हैं।

अब इन मॉडलों की वास्तविक उपयोगिता उनके व्यावहारिक प्रदर्शन, डेवलपर अपनाने और संस्थानों में सफल इस्तेमाल से तय होगी।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई तकनीकी जानकारी MeitY और IndiaAI Mission की आधिकारिक घोषणा पर आधारित है। मॉडल की क्षमताओं के बारे में बताए गए उपयोग संभावित उपयोग हैं। वास्तविक परिणाम मॉडल के संस्करण, हार्डवेयर और इस्तेमाल के तरीके के अनुसार अलग हो सकते हैं।