नई दिल्ली, 5 नवंबर 2026: भारत में बैंकिंग और डिजिटल वित्तीय सेवाओं से जुड़े संस्थानों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से किए जा रहे साइबर हमलों को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की गई है। भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (CERT-In) ने 4 नवंबर को एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी करते हुए 'Crafty Falcon' नाम के AI-सहायता प्राप्त साइबर खतरे की जानकारी दी है।

इस अभियान में हमलावर मशीन इंटेलिजेंस और ऑटोमेटेड टूल्स का इस्तेमाल करके वित्तीय संस्थानों के सिस्टम की कमजोरियां खोज रहे हैं। इसके बाद वे उन्हीं संस्थानों के पेमेंट और फंड डिस्बर्समेंट सिस्टम का दुरुपयोग करके अनधिकृत ट्रांजैक्शन करने की कोशिश कर रहे हैं।

CERT-In ने इस खतरे को सक्रिय और जारी बताया है। इसकी चेतावनी विशेष रूप से NBFC, डिजिटल लेंडिंग कंपनियों, फिनटेक संस्थानों, पेमेंट एग्रीगेटर्स और क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों के लिए है।

क्या है Crafty Falcon साइबर अटैक?

CERT-In की वित्तीय क्षेत्र से जुड़ी साइबर प्रतिक्रिया टीम CSIRT-Fin ने इस अभियान के पीछे मौजूद खतरे को Crafty Falcon नाम दिया है।

इसमें हमलावर AI आधारित टूल्स का इस्तेमाल करके संभावित लक्ष्यों की जांच करते हैं, इंटरनेट से जुड़े सिस्टम में कमजोरियां तलाशते हैं और भुगतान से जुड़े API का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं।

API यानी Application Programming Interface वह तकनीकी माध्यम है जिसके जरिए अलग-अलग सॉफ्टवेयर और वित्तीय सिस्टम आपस में जानकारी साझा करते हैं और भुगतान या फंड ट्रांसफर जैसी प्रक्रियाएं पूरी करते हैं।

यदि किसी API में सुरक्षा की कमी हो या उसकी पहुंच ठीक तरीके से नियंत्रित न की गई हो, तो हमलावर उसका गलत इस्तेमाल करके अनधिकृत वित्तीय गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश कर सकते हैं।

₹1 के छोटे ट्रांजैक्शन से भी हो सकती है जांच

इस अभियान से जुड़ी रिपोर्टों में छोटे मूल्य के ट्रांजैक्शन का इस्तेमाल करके भुगतान प्रणाली की जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है।

कुछ मामलों में हमलावर लगभग ₹1 जैसी छोटी रकम के ट्रांजैक्शन के जरिए यह जांच सकते हैं कि कोई भुगतान मार्ग या सिस्टम काम कर रहा है या नहीं। इसके बाद वे बड़ी रकम के अनधिकृत ट्रांसफर का प्रयास कर सकते हैं।

इस तरह की गतिविधि वित्तीय संस्थानों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा संकेत हो सकती है। केवल छोटी रकम होने के कारण ऐसे ट्रांजैक्शन को नजरअंदाज करना जोखिमपूर्ण हो सकता है।

हमलों में किन AI टूल्स का इस्तेमाल हुआ?

CERT-In की एडवाइजरी में हमलावरों द्वारा इस्तेमाल किए गए कई सार्वजनिक रूप से उपलब्ध AI और ऑटोमेटेड साइबर सुरक्षा टूल्स का उल्लेख किया गया है।

इनमें शामिल हैं:

  • ARTEX: AI आधारित मल्टी-एजेंट सुरक्षा और परीक्षण प्लेटफॉर्म।
  • PentAGI: ऑटोनॉमस मल्टी-AI एजेंट आधारित पेनिट्रेशन टेस्टिंग सिस्टम।
  • Cairn: हमले से जुड़े संभावित रास्तों की खोज करने वाला टूल।
  • CyberStrikeAI: AI आधारित साइबर अटैक फ्रेमवर्क।

CERT-In के अनुसार, इन टूल्स की मदद से हमलावर तेजी से कई तरह की स्क्रिप्ट तैयार कर सकते हैं, उन्हें लक्ष्य के जवाब के अनुसार बदल सकते हैं और कई चरणों वाले हमलों को ऑटोमेट कर सकते हैं।

इसका मतलब यह है कि साइबर सुरक्षा टीमों को अब केवल पारंपरिक हमलों ही नहीं, बल्कि तेज गति से बदलने वाले AI-सहायता प्राप्त हमलों के लिए भी तैयार रहना होगा।

किन वित्तीय संस्थानों को सबसे ज्यादा खतरा है?

CERT-In ने अपनी एडवाइजरी में वित्तीय सेवा क्षेत्र के कई प्रकार के संस्थानों को सतर्क रहने की सलाह दी है:

  1. Non-Banking Financial Companies (NBFCs)
  2. डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म
  3. फिनटेक कंपनियां
  4. पेमेंट एग्रीगेटर्स
  5. पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स
  6. क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल एसेट एक्सचेंज

एजेंसी ने यह भी बताया कि कुछ संस्थानों को पहले सुरक्षा उपाय करने के बावजूद दोबारा निशाना बनाया गया। इसका एक कारण पहले पहचानी गई कमजोरियों को पूरी तरह ठीक न करना हो सकता है।

हमलावर छुट्टियों, सप्ताहांत और कम निगरानी वाले समय को भी निशाना बना रहे हैं, ताकि हमले का पता लगाने और प्रतिक्रिया देने में देरी हो।

CERT-In ने कंपनियों को क्या सलाह दी है?

CERT-In ने वित्तीय संस्थानों को अपने सिस्टम की सुरक्षा मजबूत करने के लिए कई कदम उठाने की सलाह दी है।

24 घंटे निगरानी: कंपनियों को अपने महत्वपूर्ण सिस्टम पर लगातार सुरक्षा निगरानी रखनी चाहिए। छुट्टियों और सप्ताहांत में भी पर्याप्त सुरक्षा टीम उपलब्ध होनी चाहिए।

API सुरक्षा: पेमेंट और फंड डिस्बर्समेंट API की पहुंच को सीमित करना, उनकी नियमित जांच करना और अनधिकृत अनुरोधों को रोकना जरूरी है।

सिस्टम अलग रखना: टेस्टिंग, स्टेजिंग और प्रोडक्शन एनवायरनमेंट को अलग-अलग रखना चाहिए, ताकि एक सिस्टम में सेंध लगने पर दूसरे महत्वपूर्ण सिस्टम प्रभावित न हों।

ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग: छोटे मूल्य के संदिग्ध ट्रांजैक्शन, नए लाभार्थियों को अचानक होने वाले बड़े भुगतान और असामान्य गतिविधियों की पहचान के लिए निगरानी मजबूत करनी चाहिए।

संदिग्ध गतिविधि की रिपोर्टिंग: साइबर हमले के संकेत मिलने पर संस्थानों को जरूरी लॉग और डिजिटल सबूत सुरक्षित रखते हुए CERT-In तथा संबंधित साइबर सुरक्षा एजेंसियों को सूचित करना चाहिए।

क्या आम बैंक और UPI ग्राहकों को भी चिंता करनी चाहिए?

इस एडवाइजरी का मुख्य फोकस वित्तीय संस्थानों के तकनीकी सिस्टम, पेमेंट API और फंड डिस्बर्समेंट प्लेटफॉर्म पर है। इसका यह अर्थ नहीं है कि सभी UPI उपयोगकर्ताओं के खाते सीधे इस अभियान से प्रभावित हुए हैं।

फिर भी, बैंकिंग और डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल करने वाले लोगों को सामान्य साइबर सुरक्षा सावधानियां अपनानी चाहिए:

  • किसी अनजान व्यक्ति के साथ OTP, UPI PIN या बैंकिंग पासवर्ड साझा न करें।
  • अनजान लिंक और संदिग्ध ऐप डाउनलोड करने से बचें।
  • बैंकिंग ऐप और मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम को अपडेट रखें।
  • खाते में कोई अनधिकृत ट्रांजैक्शन दिखाई देने पर तुरंत बैंक को सूचित करें।
  • साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने पर भारत के आधिकारिक साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें।

निष्कर्ष

Crafty Falcon अभियान की चेतावनी दिखाती है कि AI का इस्तेमाल अब केवल उत्पादकता और ऑटोमेशन के लिए ही नहीं, बल्कि साइबर अपराधों में भी किया जा रहा है। CERT-In के अनुसार, हमलावरों की तेज और ऑटोमेटेड तकनीक वित्तीय संस्थानों के लिए नई सुरक्षा चुनौतियां पैदा कर रही है।

बैंक, NBFC और फिनटेक कंपनियों के लिए API सुरक्षा, लगातार निगरानी और समय पर कमजोरियों को ठीक करना पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। वहीं, आम ग्राहकों को भी अपनी बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखने और संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत रिपोर्ट करने की जरूरत है।

डिस्क्लेमर: यह लेख CERT-In की 4 नवंबर 2026 की एडवाइजरी और उपलब्ध समाचार रिपोर्टों पर आधारित है। एडवाइजरी में बताए गए हमलों को सभी बैंकों या आम ग्राहकों के खातों पर हुए हमलों के रूप में नहीं समझना चाहिए। किसी विशेष संस्था को हुए नुकसान या उसकी पहचान के बारे में दावा तभी किया जाना चाहिए जब उसकी पुष्टि आधिकारिक रूप से उपलब्ध हो।