नई दिल्ली, 5 नवंबर 2026: भारत में सौर और पवन ऊर्जा की बढ़ती हिस्सेदारी के बीच बिजली को बड़े पैमाने पर स्टोर करने की क्षमता मजबूत करने की तैयारी शुरू हो गई है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 4 नवंबर को ग्रिड-स्केल एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के विकास के लिए ₹14,500 करोड़ की Viability Gap Funding (VGF) योजना को मंजूरी दी। इस योजना के तहत वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 के बीच देश में 92 GWh नई ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।

इस पहल का उद्देश्य बिजली ग्रिड को अधिक स्थिर बनाना, नवीकरणीय ऊर्जा का बेहतर इस्तेमाल करना और उपभोक्ताओं को चौबीसों घंटे भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में काम करना है।

₹14,500 करोड़ की योजना में क्या-क्या शामिल है?

सरकार की इस योजना के तहत तीन प्रकार की ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं को समर्थन दिया जाएगा:

इन परियोजनाओं के विकास के लिए सरकार वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगी। VGF यानी Viability Gap Funding का उद्देश्य ऐसी परियोजनाओं को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने में मदद करना है, जिनकी शुरुआती लागत अधिक होने के कारण निजी निवेश आकर्षित करना मुश्किल हो सकता है।

यह सहायता परियोजनाओं के विकास और निवेश को प्रोत्साहित करेगी। इसका अर्थ यह नहीं है कि सरकार सीधे सभी बैटरी या पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं का निर्माण स्वयं करेगी।

Battery Energy Storage System क्या होता है?

Battery Energy Storage System यानी BESS ऐसी तकनीक है जिसमें अतिरिक्त बिजली को बैटरियों में स्टोर किया जाता है और जरूरत पड़ने पर ग्रिड में वापस भेजा जाता है।

उदाहरण के लिए, दिन के समय सौर ऊर्जा से जरूरत से ज्यादा बिजली पैदा हो सकती है। इस अतिरिक्त बिजली को बैटरी में स्टोर करके शाम या रात में इस्तेमाल किया जा सकता है, जब सौर उत्पादन कम या बंद हो जाता है।

इससे बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

Pumped Storage Projects कैसे काम करते हैं?

Pumped Storage एक ऐसी तकनीक है जिसमें दो अलग-अलग ऊंचाई पर स्थित जलाशयों का इस्तेमाल किया जाता है।

जब बिजली की उपलब्धता अधिक होती है, तब पानी को निचले जलाशय से पंप करके ऊंचे जलाशय में पहुंचाया जाता है। जब बिजली की मांग बढ़ती है, तब पानी को वापस नीचे छोड़ा जाता है और टर्बाइन के माध्यम से बिजली पैदा की जाती है।

इस तकनीक का फायदा यह है कि बड़े पैमाने पर ऊर्जा को लंबे समय तक स्टोर करने में मदद मिल सकती है। भारत में पहाड़ी और जल संसाधनों वाले क्षेत्रों में ऐसी परियोजनाओं की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।

नवीकरणीय ऊर्जा के लिए क्यों जरूरी है यह योजना?

भारत में सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन मौसम और प्राकृतिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है। सौर ऊर्जा दिन के समय अधिक उपलब्ध होती है, जबकि बिजली की मांग शाम और रात में भी बनी रहती है।

ऊर्जा भंडारण की पर्याप्त क्षमता न होने पर अतिरिक्त बिजली का पूरा इस्तेमाल करना और मांग बढ़ने पर लगातार आपूर्ति बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

नई योजना से कई क्षेत्रों में मदद मिलने की उम्मीद है:

  • ग्रिड स्थिरता: बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाने में सहायता।
  • सौर ऊर्जा का बेहतर इस्तेमाल: दिन में पैदा हुई अतिरिक्त बिजली को बाद के समय के लिए स्टोर करना।
  • पवन ऊर्जा का उपयोग: उत्पादन और मांग के समय में अंतर को कम करने में मदद।
  • बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता: जरूरत के समय अतिरिक्त ऊर्जा उपलब्ध कराना।
  • निजी निवेश: ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं में निवेश को प्रोत्साहन देना।

घरेलू बैटरी निर्माण को भी मिलेगा बढ़ावा

सरकार ने Battery Energy Storage Systems के लिए घरेलू सामग्री से जुड़ी अनिवार्य शर्त भी शामिल की है। इसका उद्देश्य भारत में बैटरी निर्माण क्षमता को बढ़ावा देना और आयात पर निर्भरता कम करना है।

इससे भविष्य में बैटरी निर्माण, ऊर्जा प्रबंधन, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और संबंधित औद्योगिक क्षेत्रों में नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

हालांकि, घरेलू विनिर्माण पर वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां कितनी उत्पादन क्षमता विकसित करती हैं और परियोजनाओं में घरेलू उपकरणों तथा सामग्री का इस्तेमाल किस स्तर पर होता है।

2031-32 तक भारत का ऊर्जा भंडारण लक्ष्य

सरकार के अनुसार, भारत को 2031-32 तक लगभग 411 GWh ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण क्षमता की जरूरत होगी। नई योजना के तहत विकसित होने वाली 92 GWh क्षमता इस दीर्घकालिक जरूरत को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।

यह क्षमता अभी निर्माणाधीन या विकसित की जाने वाली परियोजनाओं से जुड़ी है। इसलिए इसे तत्काल उपलब्ध बिजली भंडारण क्षमता नहीं समझना चाहिए।

निष्कर्ष

₹14,500 करोड़ की VGF योजना भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कदम है। सौर और पवन ऊर्जा की बढ़ती हिस्सेदारी के साथ बिजली को स्टोर करने की क्षमता भी मजबूत करना जरूरी है। 92 GWh की नई क्षमता विकसित होने से ग्रिड स्थिरता, नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल और बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता में सुधार की संभावनाएं बन सकती हैं।

हालांकि, योजना का वास्तविक प्रभाव परियोजनाओं के चयन, निवेश, निर्माण और समय पर संचालन पर निर्भर करेगा।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी केंद्रीय मंत्रिमंडल और प्रेस सूचना ब्यूरो की 4 नवंबर 2026 की घोषणा पर आधारित है। प्रस्तावित क्षमता को चालू या उपलब्ध क्षमता नहीं माना जाना चाहिए। परियोजनाओं की प्रगति और समयसीमा में बदलाव संभव है।