रायपुर :- राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA), नई दिल्ली द्वारा आयुष्मान योजना के तहत VERY HIGH RISK स्कोर वाले 17 अस्पतालों को चिन्हांकित किए जाने के बाद छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने जांच तेज कर दी है। संचालनालय, स्वास्थ्य सेवाएं द्वारा गठित राज्य स्तरीय जांच दल ने संबंधित अस्पतालों का निरीक्षण कर आयुष्मान योजना के तहत मरीजों को दिए गए उपचार से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। अधिकारियों के मुताबिक, प्राप्त दस्तावेजों का विस्तृत परीक्षण किया जाएगा और सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
जांच के दायरे में रायपुर के 7, बिलासपुर के 3, दुर्ग के 2 तथा सरगुजा, बस्तर, कबीरधाम, कोंडागांव और कोरबा के एक-एक अस्पताल शामिल हैं। इनमें SCH Hospital बस्तर, Ashok Prasuti Mandir, Care N Cure Multi-speciality Hospital और Mehta Children Nursing Home बिलासपुर, Shri Shankaracharya Institute of Medical Science और Pulse Hospital दुर्ग, Jai Jagannath Healthcare कबीरधाम, Netam Hospital & Infertility Centre कोंडागांव और Hari Krishna Care Hospital कोरबा शामिल हैं।
रायपुर के SRIMSR Shri Rawatpura Sarkar Hospital, Shri Anant Sai Hospital, Shri Mahaveer Hospital, Shriniwas Hospital, SK Care Hospital, Vision Centre Eye Hospital और Vardaan Hospital भी जांच के दायरे में हैं। इसके अलावा सरगुजा के DHT Care Hospital को भी सूची में शामिल किया गया है। जांच दल ने अस्पतालों से मरीजों के उपचार और आयुष्मान योजना के तहत किए गए दावों से संबंधित दस्तावेज हासिल किए हैं, जिनका अब विस्तृत परीक्षण किया जाएगा।
इसी कार्रवाई के तहत राज्य स्तरीय जांच दल की अनुशंसा पर रायपुर के Medilife Hospital और Lotus Hospital के विरुद्ध 28 एवं 29 सितंबर 2026 को आयुष्मान योजना से De-empanelment की कार्रवाई की गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा अस्पतालों की सेवाओं और आयुष्मान योजना के तहत किए जा रहे दावों की लगातार निगरानी की जा रही है, ताकि किसी भी तरह की अनियमितता सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के निर्देशानुसार विभाग द्वारा आयुष्मान योजना के क्रियान्वयन पर सतत निगरानी रखी जा रही है। विभाग का उद्देश्य पात्र हितग्राहियों को गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और नियमानुसार स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। अधिकारियों का कहना है कि जांच से सामने आने वाले तथ्यों और निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी, जिससे योजना की पारदर्शिता और प्रभावी क्रियान्वयन को और मजबूत किया जा सके।


