हिमाचल प्रदेश :- प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार ने 6 नए जिले बनाने की संभावनाओं पर विचार शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार ने राज्य में जिलों, उपमंडलों, तहसीलों, उपतहसीलों और विकास खंडों के पुनर्गठन के लिए आयोग का गठन किया है। इस आयोग की अध्यक्षता पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति धर्म चंद चौधरी करेंगे। आयोग को छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी।
सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, आयोग प्रदेश के मौजूदा प्रशासनिक ढांचे की समीक्षा करेगा। इसमें यह आकलन किया जाएगा कि किन क्षेत्रों में नई प्रशासनिक इकाइयां बनाने, मौजूदा इकाइयों का विभाजन करने, विलय करने या पुनर्गठन की जरूरत है। फिलहाल हिमाचल प्रदेश में 12 जिले हैं। हालांकि, छह नए जिलों के गठन को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है और यह आयोग की सिफारिशों तथा सरकार के निर्णय पर निर्भर करेगा।
आयोग नई प्रशासनिक इकाइयों की जरूरत का आकलन करते समय कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार करेगा। इनमें आबादी, भौगोलिक परिस्थितियां, सड़क संपर्क, सरकारी कार्यालयों तक पहुंच, प्रशासनिक दक्षता और आम लोगों को मिलने वाली सुविधाएं शामिल हैं। इसके अलावा संबंधित विभागों, जनप्रतिनिधियों और अन्य पक्षों से परामर्श लेकर सिफारिशें तैयार की जाएंगी। पहाड़ी और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक सरकारी सेवाएं आसानी से पहुंचाना भी इस प्रक्रिया का प्रमुख उद्देश्य होगा।
नई तहसीलों, उपमंडलों या जिलों के गठन में वित्तीय पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाएगा। आयोग को संभावित नई इकाइयों के लिए कार्यालय, बुनियादी ढांचे और कर्मचारियों की जरूरत का आकलन करना होगा। साथ ही, मौजूदा संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने और प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावी बनाने के उपाय सुझाने होंगे, ताकि राज्य पर अनावश्यक वित्तीय बोझ न पड़े।
फिलहाल आयोग के गठन के साथ प्रशासनिक पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू हुई है। छह महीने में रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार उसकी सिफारिशों पर विचार करेगी। ऐसे में हिमाचल प्रदेश में छह नए जिले बनेंगे या नहीं, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल इसे नए जिलों के गठन की तैयारी के बजाय प्रशासनिक पुनर्गठन की संभावनाओं की समीक्षा के रूप में देखना उचित होगा।


