जगदलपुर :- छत्तीसगढ़ के बस्तर में देवी-देवताओं के प्रति आस्था और सदियों पुरानी धार्मिक परंपराएं आज भी जीवंत हैं। इन्हीं परंपराओं से जुड़ा एक प्रमुख धार्मिक स्थल जगदलपुर से करीब 30 किलोमीटर दूर बकावंड विकासखंड के गिरोला गांव में स्थित मां हिंगलाजिन माता का धाम है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, कभी यहां छोटी-सी कुटिया और साधारण मंदिर हुआ करता था, लेकिन समय के साथ मंदिर का स्वरूप बदलकर भव्य हो गया। आज यहां दूर-दराज के इलाकों से श्रद्धालु माता के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
पीढ़ियों से चली आ रही पूजा की परंपरा
बस्तर में ग्राम देवियों और शक्ति स्वरूपा माताओं की आराधना का विशेष महत्व है। गिरोला स्थित मां हिंगलाजिन माता का धाम भी इसी स्थानीय धार्मिक परंपरा का अहम हिस्सा माना जाता है। माता के नाम का संबंध पाकिस्तान के बलूचिस्तान में स्थित प्रसिद्ध हिंगलाज माता धाम से भी जोड़ा जाता है। हिंदू मान्यताओं में बलूचिस्तान के हिंगलाज धाम को शक्तिपीठ के रूप में पूजा जाता है। हालांकि, गिरोला के मंदिर की स्थापना का उस धाम से सीधा ऐतिहासिक संबंध प्रमाणित नहीं है।
छोटी कुटिया से भव्य मंदिर तक का सफर
स्थानीय श्रद्धालुओं के मुताबिक, पहले मां हिंगलाजिन का मंदिर साधारण स्वरूप में था और यहां छोटी-छोटी झोपड़ियों में पूजा-अर्चना की जाती थी। समय के साथ मंदिर का निर्माण और विस्तार हुआ। कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले देवी का स्थान डीआरडीओ परिसर के भीतर था, जिसके बाद वर्तमान स्थल पर मंदिर का निर्माण कराया गया। हालांकि, मंदिर के मूल स्थान, स्थापना और स्थान परिवर्तन से जुड़ी जानकारी की स्वतंत्र ऐतिहासिक पुष्टि होना बाकी है।
नवरात्रि में उमड़ती है श्रद्धालुओं की आस्था
मां हिंगलाजिन माता के दरबार में छत्तीसगढ़ के अलग-अलग क्षेत्रों के साथ पड़ोसी राज्य ओडिशा से भी भक्त पहुंचते हैं। मंदिर के पुजारी के अनुसार, यहां सालभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, जबकि नवरात्रि के दौरान विशेष उत्साह देखने को मिलता है। पंचमी और अष्टमी जैसे अवसरों पर भी बड़ी संख्या में भक्त माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इन दिनों मंदिर परिसर में धार्मिक गतिविधियां और पूजा-अर्चना श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहती हैं।
बस्तर की धार्मिक पहचान का अहम हिस्सा
गिरोला का मां हिंगलाजिन माता धाम स्थानीय जनआस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। पीढ़ियों से चली आ रही पूजा परंपरा और समय के साथ मंदिर के बदलते स्वरूप ने इस धाम को व्यापक पहचान दिलाई है। मंदिर की स्थापना और प्राचीन इतिहास से जुड़े दस्तावेजों का संकलन इस धार्मिक स्थल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को बेहतर ढंग से समझने में मदद कर सकता है।


