अक्टूबर और नवंबर के दौरान मौसम में तेजी से बदलाव होने लगता है। सुबह-शाम ठंडक, तापमान में उतार-चढ़ाव और बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच कई लोगों को खांसी, गले में खराश और बलगम की समस्या होने लगती है। कुछ लोगों में यह परेशानी कुछ दिनों में ठीक हो जाती है, जबकि कई लोगों की खांसी लंबे समय तक बनी रहती है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि खांसी मौसम में बदलाव के कारण होने वाली एलर्जी, वायरल संक्रमण या वायु प्रदूषण की वजह से हो रही है।
एलर्जी वाली खांसी में बुखार के बजाय छींक और खुजली हो सकती है। मौसम बदलने के दौरान धूल, मिट्टी और परागकण जैसे एलर्जी पैदा करने वाले तत्व संवेदनशील लोगों को प्रभावित कर सकते हैं। इसके कारण सूखी खांसी, बार-बार छींक आना, नाक बहना, गले में खराश और आंखों में खुजली या पानी आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अगर धूल या किसी खास जगह पर जाने के बाद खांसी बढ़ती है और बुखार नहीं होता, तो एलर्जी इसकी संभावित वजह हो सकती है।
खांसी के साथ बुखार और बदन दर्द हो तो वायरल संक्रमण की आशंका हो सकती है।वायरल संक्रमण होने पर खांसी के अलावा गले में दर्द, नाक बहना, सिरदर्द, थकान और कमजोरी जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। कुछ मामलों में शुरुआत में सूखी खांसी होती है, जो बाद में बलगम वाली खांसी में बदल सकती है। यदि घर या आसपास किसी व्यक्ति को सर्दी-जुकाम है और उसके संपर्क में आने के बाद लक्षण शुरू हुए हैं, तो संक्रमण की संभावना पर ध्यान देना चाहिए।
प्रदूषण भी बन सकता है खांसी और गले में जलन की वजह। अक्टूबर-नवंबर में कई शहरों में वायु गुणवत्ता खराब होने से हवा में मौजूद सूक्ष्म प्रदूषक कण सांस की नली को प्रभावित कर सकते हैं। इसके कारण सूखी खांसी, गले में जलन, सीने में भारीपन और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। ट्रैफिक वाली सड़कों, धूल और धुएं के संपर्क में आने पर खांसी बढ़ना प्रदूषण से जुड़ी परेशानी का संकेत हो सकता है। अस्थमा या अन्य श्वसन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
खांसी होने पर क्या करें और कब डॉक्टर से संपर्क करें?
मौसम बदलने के दौरान पर्याप्त पानी पिएं, धूल-धुएं से बचें और प्रदूषण अधिक होने पर बाहर निकलते समय अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क इस्तेमाल करें। घर में धूल जमा न होने दें और कमरे में उचित वेंटिलेशन बनाए रखें। अगर खांसी लगातार बनी रहे या बढ़ती जाए, तो डॉक्टर से सलाह लें। सांस लेने में गंभीर परेशानी, सीने में दर्द या खून वाली खांसी होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें। ध्यान रखें कि केवल लक्षणों के आधार पर एलर्जी, संक्रमण और प्रदूषण में अंतर करना हमेशा संभव नहीं होता, इसलिए जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी है।


