शारदीय नवरात्र की नवमी पर अंबिकापुर के प्रसिद्ध मां महामाया मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। इस अवसर पर सरगुजा राजपरिवार के मुखिया टीएस सिंहदेव ने सोमवार को परंपरा के अनुसार अष्टमी और नवमी की संधि पूजा की। उन्होंने मां महामाया की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर कुष्मांड की बलि अर्पित की। सुबह से ही मंदिर में भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं और पूरा परिसर भक्तिमय माहौल में डूबा रहा।

दो घंटे तक श्रद्धालुओं के लिए बंद रहे मंदिर के कपाट

संधि पूजा के विशेष अनुष्ठान के चलते मां महामाया मंदिर के कपाट लगभग दो घंटे तक श्रद्धालुओं के लिए बंद रखे गए। पूजा संपन्न होने के बाद मंदिर के द्वार दोबारा भक्तों के दर्शन के लिए खोल दिए गए। मां महामाया सरगुजा राजपरिवार की कुलदेवी हैं, इसलिए राजपरिवार की ओर से की जाने वाली इस पूजा का विशेष धार्मिक और पारंपरिक महत्व माना जाता है।

राजपरिवार के सदस्य भी रहे मौजूद

इस धार्मिक अनुष्ठान में राजपरिवार के सदस्य आदितेश्वर सिंहदेव सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। मंदिर के मुख्य पुजारी ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संधि पूजा संपन्न कराई। पूजा के बाद टीएस सिंहदेव ने परंपरा के अनुसार मां महामाया की आराधना और कुष्मांड की बलि अर्पित करने की जानकारी दी। इसके बाद वह समलाया मंदिर पहुंचे और वहां भी विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। मान्यता के अनुसार, मां महामाया के पूजन के बाद मां समलाया के दर्शन करना इस धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

शक्तिपीठों और दुर्गा पंडालों में भी उमड़ी भीड़

नवरात्र की अष्टमी और नवमी के अवसर पर शहर के अन्य मंदिरों और दुर्गा पंडालों में भी संधि पूजा का आयोजन किया गया। मां महामाया मंदिर में तड़के चार बजे से ही श्रद्धालुओं की कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। इसके अलावा गांधी चौक स्थित मां दुर्गा मंदिर, संत हरकेवल दास मंदिर, वनदेवी सांडबार और विभिन्न काली मंदिरों में भी विशेष पूजा-अर्चना हुई। कई स्थानों पर कन्या भोज का आयोजन कर श्रद्धालुओं ने धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया।

सुरक्षा और यातायात के किए गए इंतजाम

नवरात्र के दौरान मंदिरों और पूजा पंडालों में उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए विशेष इंतजाम किए। प्रमुख धार्मिक स्थलों के आसपास पुलिस बल तैनात किया गया, वहीं भीड़ को नियंत्रित करने और आवागमन सुचारू बनाए रखने के लिए कुछ मार्गों पर यातायात में बदलाव भी किए गए। श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा की आराधना कर परिवार और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की।