आज यानी 20 अक्टूबर को देशभर में दशहरा यानी विजयादशमी का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर लंका पर विजय प्राप्त की थी। वहीं, विजयादशमी को मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व है।
दशहरा 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट से शुरू होकर 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट तक रहेगी। विजयादशमी पर पूजा के लिए विजय मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 59 मिनट से 2 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। वहीं, अपराह्न पूजा का शुभ समय दोपहर 1 बजकर 14 मिनट से 3 बजे तक बताया गया है। इस दौरान श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
रावण दहन का समय
विजयादशमी के अवसर पर आज शाम को देशभर में रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। परंपरा के अनुसार, रावण के साथ कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का भी दहन किया जाता है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 20 अक्टूबर को सूर्यास्त के बाद शाम 5 बजकर 45 मिनट से रात 8 बजकर 30 मिनट के बीच विभिन्न रामलीला मैदानों में रावण दहन के आयोजन हो सकते हैं। हालांकि, कार्यक्रम का सटीक समय शहर और स्थानीय आयोजन समितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
ऐसे करें दशहरा की पूजा
दशहरा के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल पर भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा करें। देवी दुर्गा का पूजन भी करें और भगवान को रोली, चंदन, अक्षत, पुष्प तथा नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद आरती करें और प्रसाद वितरित करें। इस दिन शमी पूजा और अपराजिता पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है।
सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी के दिन भगवान श्रीराम की आराधना करने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है। यह पर्व लोगों को सत्य, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। दशहरा केवल रावण दहन का त्योहार नहीं, बल्कि अपने भीतर मौजूद अहंकार, क्रोध और बुराइयों को त्यागने का संदेश भी देता है। देशभर में इस अवसर पर मेले, रामलीला और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए पर्व की खुशियां मनाई जा रही हैं।


