हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज ऐसी बीमारियां हैं, जो शुरुआती दौर में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर में धीरे-धीरे बढ़ सकती हैं। यही वजह है कि कई लोग खुद को स्वस्थ महसूस करते हुए भी इन बीमारियों की जांच नहीं कराते। खोखोपारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. शुभ्रत सिंह ठाकुर ने लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परामर्श देते हुए नियमित रूप से बीपी और ब्लड शुगर की जांच कराने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि समय पर बीमारी का पता चलने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।
अनियंत्रित बीपी और शुगर से दिल, किडनी और आंखों को खतरा
डॉ. ठाकुर के अनुसार, लंबे समय तक ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर का स्तर नियंत्रित नहीं रहने से शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंच सकता है। इससे हृदय रोग, किडनी संबंधी समस्याएं, आंखों की रोशनी प्रभावित होने और नसों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ महसूस करना पर्याप्त नहीं है। नियमित जांच के साथ डॉक्टर की सलाह के अनुसार स्वास्थ्य की निगरानी करना जरूरी है।
खान-पान और व्यायाम से रखें बीपी-शुगर नियंत्रित
ब्लड प्रेशर और डायबिटीज को नियंत्रित रखने के लिए संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि महत्वपूर्ण है। भोजन में नमक और अधिक मीठी चीजों की मात्रा सीमित रखें। हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और ताजे मौसमी फल शामिल करें। अपनी उम्र और शारीरिक क्षमता के अनुसार रोजाना पैदल चलना या हल्का व्यायाम करना भी फायदेमंद हो सकता है। वजन को स्वस्थ सीमा में बनाए रखना और सक्रिय जीवनशैली अपनाना इन बीमारियों के प्रबंधन में मदद करता है।
डॉक्टर की सलाह के बिना बंद न करें दवाएं
डॉ. ठाकुर ने बीपी और डायबिटीज के मरीजों को दवाओं के सेवन में सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि जांच में रीडिंग सामान्य आने का मतलब यह नहीं है कि बीमारी पूरी तरह ठीक हो गई है। कई बार दवाओं के नियमित सेवन से ही बीपी और शुगर का स्तर नियंत्रण में रहता है। ऐसे में मरीजों को डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद नहीं करनी चाहिए और न ही खुराक में बदलाव करना चाहिए। दवाओं से जुड़ा कोई भी निर्णय चिकित्सकीय परामर्श के आधार पर ही लेना चाहिए।
इन लोगों को नियमित जांच पर देना चाहिए विशेष ध्यान
जिन लोगों के परिवार में हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज का इतिहास रहा है, जिनका वजन अधिक है या जिनकी जीवनशैली में शारीरिक गतिविधि कम है, उन्हें नियमित स्वास्थ्य जांच के प्रति विशेष सतर्क रहना चाहिए। डॉ. शुभ्रत सिंह ठाकुर ने कहा कि समय पर बीमारी की पहचान, नियमित निगरानी, संतुलित खान-पान और स्वस्थ दिनचर्या अपनाकर इन बीमारियों से होने वाली गंभीर जटिलताओं के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।


